Moratorium Period News: कोरोना महामारी के दौरान लोन की किस्त टालने की अवधि में बैंक अपने ग्राहकों से ब्याज लेंगे या नहीं, इस बारे में जल्द ही फैसला होने वाला है. केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर मोरैटोरियम अवधि (ऋण की किस्त टालने की अवधि) के दौरान बैंकों द्वारा ब्याज वसूलने पर 2-3 दिन में फैसला होने की संभावना है. शीर्ष अदालत ने टाली गई किस्तों पर ब्याज लेने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र से निर्णय को रिकॉर्ड में लाने और संबंधित पक्षकारों को हलफनामा देने को कहा. केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि इस मामले में बहुत गंभीरता के साथ विचार किया गया है और निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद उन्नत स्तर पर है.Also Read - CBI probe In ADJ Uttam Anand Murder Case: झारखंड सरकार ने जज की मौत की जांच CBI को सौंपने की अनुशंसा की

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह विभिन्न उद्योगों, व्यापार संघों और व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई पांच अक्टूबर को करेगी. पीठ में न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायामूर्ति एम आर शाह भी शामिल हैं. Also Read - रेप करने वाले 53 साल के पादरी से शादी करना चाहती है 17 साल की लड़की, दुष्कर्म के बाद एक बच्चे को दे चुकी है जन्म

पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बयान को दर्ज किया. मेहता ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार सक्रियता के साथ विचार कर रही है और इस पर दो-तीन दिनों के भीतर फैसला होने की संभावना है. Also Read - PM Modi की आलोचना वाले पोस्टरों को बताया 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता', SC पहुंचा तो पड़ी फटकार

पीठ ने कहा कि मेहता गुरुवार तक संबंधित पक्षों को हलफनामा देने का प्रयास करें, ताकि इस मामले की सुनवाई पांच अक्टूबर को हो. पीठ ने कहा, ‘‘सरकार द्वारा लिए गए फैसले को हलफनामे के साथ रिकॉर्ड में लाया जाना चाहिए.’’

मेहता ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और निर्णय लेने के बाद हलफनामा दाखिल किया जा सकता है. इसके बाद पीठ ने कहा, ‘‘उन्होंने (मेहता) ने कहा है कि वह मामले में उपस्थित वकीलों को एक अक्टूबर तक ईमेल के जरिए हलफनामा भेज देंगे. मामले की सुनवाई पांच अक्टूबर 2020 को होगी.’’

मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार कई आर्थिक पहलुओं पर विचार कर रही है. पीठ ने कहा, ‘‘हम सोमवार (पांच अक्टूबर) को मामले की सुनवाई करेंगे. आपकी जो भी नीति है, जो भी आप चाहते हैं, उसे बताइए. हम इस मामले को सोमवार को सुनेंगे. हम आगे कोई स्थगन नहीं चाहते हैं.’’ मुख्य याचिकाकर्ता गजेंद्र शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव दत्ता ने कहा कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण मामला है और बैंक ऐसे काम कर रहे हैं, मानो यह एक बहुत ही सामान्य मुद्दा है.

मेहता ने उनसे 2-3 दिन इंतजार करने का अनुरोध किया, ताकि सरकार अंतिम फैसला ले सके. मेहता ने कहा, ‘‘मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह विचाराधीन है और यह बहुत ही उन्नत चरण में है.’’

(इनपुट-भाषा)