रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी दो दशक पुराने कथित शेयर अनियमितता के मामले में बाजार नियामक सेबी द्वारा लगाये गये जुर्माने के खिलाफ अपील करेंगे. कंपनी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. Also Read - Antilia Case: NIA ने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पूर्व पुलिस अफसर प्रदीप शर्मा से 9 घंटे तक की पूछताछ

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने 1994 में परिवर्तनीय वारंट के साथ डिबेंचर जारी किये थे और इन वारंट के एवज में 2000 में इक्विटी शेयर आवंटित किये. यह मामला तबका है जब धीरुभाई अंबानी रिलायंस का नेतृत्व कर रहे थे. तब रिलायंस समूह का बंटवारा नहीं हुआ था. Also Read - मुकेश, अनिल, नीता और टीना अंबानी पर 25 करोड़ का जुर्माना, जानिए क्या है मामला

आरआईएल ने शेयर बाजार में दायर जानकारी में कहा है, ‘‘सेबी ने इस मामले में फरवरी 2011 मे कारण बताओ नोटिस जारी किया था. यह नोटिस उस समय के प्रवतक और प्रवर्तक समूह को शेयरों के अधिग्रहण के 11 साल बाद जारी किया गया. इसमें सेबी के अधिग्रहण नियमन का उल्लंघन किये जाने का आरोप लगाया गया. Also Read - World’s Richest List 2021: लगातार चौथी बार जेफ बेजोस दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने, मुकेश अंबानी भी लिस्ट में

कारण बताओ नोटिस पर अब फैसला किया गया है जो कि शेयर अधिग्रहण के 21 साल बाद आया है. इसमें उस समय के कंपनी के प्रवर्तकों पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. प्रवर्तकों में मुकेश और अनिल दोनों भाइयों तथा अन्य लोगों पर यह जुर्माना लगाया गया है. उसके बाद पिता की मृत्यू के बाद मुकेश और अनिल ने कंपनी का बंटवारा कर लिया है.

सेबी ने अंबानी बंधुओं और अन्य प्रवर्तक परिवार सदस्यों पर जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना उनके द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज में जनवरी 2000 के इश्यू में अपनी सामूहिक हिस्सेदारी को करीब सात प्रतिशत बढ़ाते समय नियामकीय जानकारी नहीं देने पर लगाया गया है.

(इनपुट-भाषा)