इन 5 म्यूचुअल फंड से सिक्योर करें अपने बच्चों का फ्यूचर, पढ़ाई से लेकर शादी तक की टेंशन होगी खत्म

Children Mutual Fund: ये खास तरह के ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड्स होते हैं. इनका मकसद बच्चों की शुरुआती पढ़ाई, विदेश में हायर एजुकेशन और शादी के लिए पैसा जमा करना है. इन स्कीम्स में एक अनिवार्य लॉक-इन पीरियड होता है. हम आपको ऐसे 5 चिल्ड्रेन फंड के बारे में बता रहे हैं.

Published date india.com Published: December 19, 2025 9:26 PM IST
इन 5 म्यूचुअल फंड से सिक्योर करें अपने बच्चों का फ्यूचर, पढ़ाई से लेकर शादी तक की टेंशन होगी खत्म
चिल्ड्रेन म्यूचुअल फंड में आप अपनी सुविधा के अनुसार SIP या एकमुश्त (Lumpsum) पैसा लगा सकते हैं.

नौकरीशुदा हर शख्स की दो चिंता होती है. पहली- अपने बच्चों का फ्यूचर कैसा बनेगा? दूसरी- अपने रिटायरमेंट लाइफ के खर्चें कैसे निकलेंगे? आज की महंगाई के दौर में इन दोनों चिंताओं का होना स्वभाविक है. अपन बुढ़ापे को सिक्योर करने और बच्चों के भविष्य को फाइनेंशियली मजबूती देने के लिए सही समय पर सही प्लान में निवेश करना जरूरी है. बात जब बच्चों के भविष्य और स्मार्ट प्लानिंग की हो, तो चिल्ड्रेन म्यूचु्अल फंड काफी अच्छा ऑप्शन है.

क्या होते हैं चिल्ड्रेन म्यूचुअल फंड्स?
ये खास तरह के ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड्स होते हैं. इनका मकसद बच्चों की शुरुआती पढ़ाई, विदेश में हायर एजुकेशन और शादी के लिए पैसा जमा करना है. इन स्कीम्स में एक अनिवार्य लॉक-इन पीरियड होता है. निवेश करने के बाद आप कम से कम 5 साल या बच्चे के 18 साल का होने तक, जो भी पहले हो, पैसा नहीं निकाल सकते.

कैसे काम करता है ये फंड?
चिल्ड्रेन म्यूचुअल फंड्स का ज्यादातर हिस्सा इक्विटी यानी शेयर मार्केट में निवेश किया जाता है. इससे लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है. इसके साथ ही कुछ फंड्स हाइब्रिड मॉडल भी काम करते हैं. यानी इसमें इक्विटी और डेट दोनों तरह के फंड होते हैं, जिनमें पैसा लगाया जाता है. फंड मैनेजर बहुत सोच-समझकर स्टॉक्स चुनते हैं, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों को मुनाफा हो सके.

कैसे कर सकते हैं निवेश और कितना मिलेगा रिटर्न?
चिल्ड्रेन म्यूचुअल फंड में आप अपनी सुविधा के अनुसार SIP या एकमुश्त (Lumpsum) पैसा लगा सकते हैं. माता-पिता चाहें तो हर साल निवेश की राशि को थोड़ा-थोड़ा बढ़ा (Top-up) भी सकते हैं. यह लचीलापन इसे हर परिवार के लिए उपयोगी बनाता है. ये बाजार से जुड़े निवेश हैं, इसलिए इनमें गारंटीड रिटर्न की सुविधा नहीं होती. इक्विटी में निवेश होने के कारण शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव आ सकता है.

टॉप 5 चिल्ड्रेन फंड के बारे में जानिए:-

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1.SBI मैगनम चिल्ड्रेन्स बेनिफिट फंड: SBI म्यूचुअल फंड के आधिकारिक पेज पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, पिछले 5 साल में इस फंड ने करीब 32.51% CAGR का रिटर्न दिया है. ये आंकड़ा सिर्फ Hybrid Funds में ही नहीं, बल्कि सभी कैटेगरी के इक्विटी फंड्स से भी बेहतर है.

2. HDFC चिल्ड्रेन्स गिफ्ट फंड: ये HDFC का डायरेक्ट प्लान है. इस फंड ने 5 साल में 19.32% का रिटर्न दिया है. इसका बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 हाइब्रिड कंपोजिट डेट 65:35 इंडेक्स है. इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 9,803.90 करोड़ रुपये है.

3. UTI चिल्ड्रेन्स इक्विटी फंड: इस फंड ने 5 साल में 18.29% रिटर्न दिया है. इसका बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 500 टोटल रिटर्न इंडेक्स है. इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 1,112.78 करोड़ रुपये है.

4. ICICI प्रूडेंशियल चाइल्ड केयर फंड – गिफ्ट प्लान: ये ICICI का गिफ्ट प्लान है. इसने 5 साल में 17.23% रिटर्न दिया है. इसका बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 हाइब्रिड कंपोजिट डेट 65:35 इंडेक्स है. इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 1,315.40 करोड़ रुपये है.

5. आदित्य बिड़ला सन लाइफ बाल भविष्य योजना: इस फंड का 5 साल का रिटर्न 14.43% रहा है. इसका बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 500 टोटल रिटर्न इंडेक्स है. इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 1,081.64 करोड़ रुपये है.

इन बातों को जानना जरूरी

  • म्यूचुअल फंड में रेगुलर प्लान और डायरेक्ट प्लान 2 ऑप्शन मिलते हैं. रेगुलर प्लान में ब्रोकर के जरिये निवेश किया जाता है, जिसके कारण एक्सपेंस रेशियो ज्यादा होता है.
  • डायरेक्ट प्लान में आप सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी में निवेश करते हैं, जिससे डिस्ट्रिब्यूशन चार्जेस और कमीशन नहीं लगता. ऐसे में एक्सपेंस रेशियो कम होता है.
  • एक्टिव रूप से मैनेज्ड म्यूचुअल फंड की तुलना में पैसिव फंड जैसे इंडेक्स फंड या ETF कम एक्सपेंस रेशियो वाले फंड होते हैं. इसका कारण यह है कि पैसिव फंडों को कम मैनेज करने की जरूरत होती है. इसलिए पैसिव फंड चुनना चाहिए.
  • बड़े म्यूचुअल फंड, जिनके पास अधिक संपत्ति होती है, वे अक्सर छोटे फंडों की तुलना में कम एक्सपेंस रेशियो ऑफर करते हैं. इससे निवेशकों को फायदा होता है.
  • अगर आप लॉन्ग टर्म निवेश कर रहे हैं, तो एक्सपेंस रेशियो में थोड़ी सी भी कमी आपके रिटर्न को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है, क्योंकि समय के साथ यह रकम कंपाउंड इंटरेस्ट की तरह बढ़ती है.

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