म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले जरूर चेक करें ये 5 चीजें, एक चूक से ही सारे हिसाब-किताब पर फिर जाएगा पानी

म्यूचुअल फंड में कई तरह के खर्च भी शामिल होते हैं. इन्हें टेक्निकल टर्म में रेश्यो कहते हैं. क्योंकि, आपके निवेश के एक हिस्से से ही ये खर्चे निकाले जाते हैं. ऐसे में अगर आपने निवेश से पहले इन रेश्यो को इग्नोर किया, तो आपके रिटर्न के सारे हिसाब-किताब पर पानी फिर जाएगा.

Published date india.com Published: January 21, 2026 9:18 PM IST
म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले जरूर चेक करें ये 5 चीजें, एक चूक से ही सारे हिसाब-किताब पर फिर जाएगा पानी
प्रतीकात्मक फोटो.

बात जब इंवेस्टमेंट से बेहतर रिटर्न मिलने की हो, तो म्यूचुअल फंड्स का जिक्र होना जरूरी हो जाता है. म्यूचुअल फंड के जरिए छोटे निवेशक अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश कर बेहतर रिटर्न पा सकते हैं. इसमें डायवर्सिफिकेशन, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और लिक्विडिटी की भूमिका अहम होती है. मौजूदा समय में मार्केट में 30 से ज्यादा एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMC) और 1000 से ज्यादा म्यूचुअल फंड स्कीम मौजूद हैं. ऐसे में सही स्कीम चुनना निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण काम हो जाता है.

म्यूचुअल फंड में कई तरह के खर्च भी शामिल होते हैं. इन्हें टेक्निकल टर्म में रेश्यो कहते हैं. क्योंकि, आपके निवेश के एक हिस्से से ही ये खर्चे निकाले जाते हैं. ऐसे में अगर आपने निवेश से पहले इन रेश्यो को इग्नोर किया, तो आपके रिटर्न के सारे हिसाब-किताब पर पानी फिर जाएगा.

एक्सपेंस रेश्यो
आपके पैसे को मैनेज करने के लिए म्यूचुअल फंड कंपनी एक चार्ज लेती है, जिसे म्यूचुअल फंड एक्सपेंस रेश्यो (Mutual Fund Expense Ratio) कहते हैं. किसी म्यूचुअल फंड (MF) में एक्सपेंस रेशियो, फंड मैनेजमेंट का सालाना चार्ज होता है, जिसे फंड की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) के प्रतिशत के रूप में रेप्रेजेंट किया जाता है. इस चार्ज में फंड मैनेजर की फीस, मार्केटिंग और डिस्ट्रिब्यूशन कॉस्ट और एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज जैसे विभिन्न खर्च शामिल होते हैं.

एक्सपेस रेश्यो कैसे आपका रिटर्न कम करता है?
किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम का एक्सपेंस रेश्यो निवेशक के रिटर्न को सीधे प्रभावित करता है. जितना ज्यादा एक्सपेंस रेश्यो होगा, निवेश पर उतना अधिक चार्ज लगेगा. इससे कुल रिटर्न में कमी आएगी. एक्सपेंस रेश्यो जितना कम होगा, आपका रिटर्न उतना ज्यादा हो जाएगा. लॉन्ग टर्म में एक्सपेंस रेश्यो का नुकसान ज्यादा हो सकता है. ऐसे में लॉनग टर्म म्यूचुअल फंड करते समय एक्सपेस रेश्यो को समझ लेना बहुत जरूरी है.

मान लीजिए कि आपने एक म्यूचुअल फंड में 10,000 रुपये का निवेश किया है. फंड का एक्सपेंस रेश्यो 1% है. इसका मतलब है कि आपको सालाना 100 रुपये (10,000 x 1%) का चार्ज देना होगा. अगर फंड 10% का रिटर्न देता है, तो आपका कुल रिटर्न 1000 रुपये होगा. मगर एक्सपेंस रेश्यो 100 रुपये माइनस करने पर आपका नेट प्रॉफिट 900 रुपये ही होगा.

अल्फा रेश्यो?
अल्फा यह बताता है कि किस म्यूचुअल फंड ने अपने रिस्क के हिसाब से कितना बेहतर या खराब प्रदर्शन किया. अगर किसी फंड का अल्फा पॉजिटिव है, तो मतलब उसने अपने बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न दिया. जैसे +2 अल्फा का मतलब है कि फंड ने उम्मीद से 2% बेहतर परफॉर्म किया.

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बीटा रेश्यो?
बीटा से पता चलता है कि कोई फंड मार्केट के मुकाबले कितना जोखिम भरा है. बीटा अगर 1 है, तो फंड बाजार के साथ-साथ चलता है. 1 से कम बीटा का मतलब कम उतार-चढ़ाव और ज्यादा स्थिरता, जबकि 1 से ऊपर बीटा ज्यादा रिस्की माना जाता है.

शार्प रेश्यो?
शार्प रेश्यो यह बताता है कि लिए गए जोखिम के मुकाबले फंड ने कितना रिटर्न दिया. जितना ज्यादा शार्प रेश्यो, उतना बेहतर माना जाता है. 1 से ऊपर का शार्प रेश्यो अच्छा समझा जाता है. 1 से नीचे का मतलब यह हो सकता है कि जोखिम ज्यादा लिया गया. इसकी तुलना में रिटर्न अच्छा नहीं मिला.

स्टैंडर्ड डेविएशन
स्टैंडर्ड डेविएशन फंड के उतार-चढ़ाव को बताते हैं. 1 से ज्यादा स्टैंडर्ड डेविएशन का मतलब ज्यादा उतार-चढ़ाव और ज्यादा रिस्क है. 1 से कम स्टैंडर्ड डेविएशन वाले फंड उन निवेशकों को पसंद आते हैं, जो स्थिर रिटर्न चाहते हैं.

SIP करने से पहले इन बातों को समझना जरूरी

  • म्यूचुअल फंड में रेगुलर प्लान और डायरेक्ट प्लान 2 ऑप्शन मिलते हैं. रेगुलर प्लान में ब्रोकर के जरिये निवेश किया जाता है, जिसके कारण एक्सपेंस रेशियो ज्यादा होता है. जबकि डायरेक्ट प्लान में आप सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी में निवेश करते हैं, जिससे डिस्ट्रिब्यूशन चार्जेस और कमीशन नहीं लगता. ऐसे में एक्सपेंस रेशियो कम होता है.
  • एक्टिव रूप से मैनेज्ड म्यूचुअल फंड की तुलना में पैसिव फंड जैसे इंडेक्स फंड या ETF कम एक्सपेंस रेशियो वाले फंड होते हैं. इसका कारण यह है कि पैसिव फंडों को कम मैनेज करने की जरूरत होती है. इसलिए पैसिव फंड चुनना चाहिए.
  • बड़े म्यूचुअल फंड, जिनके पास अधिक संपत्ति होती है, वे अक्सर छोटे फंडों की तुलना में कम एक्सपेंस रेशियो ऑफर करते हैं. इससे निवेशकों को फायदा होता है.
  • अगर आप लॉन्ग टर्म निवेश कर रहे हैं, तो एक्सपेंस रेशियो में थोड़ी सी भी कमी आपके रिटर्न को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है, क्योंकि समय के साथ यह रकम कंपाउंड इंटरेस्ट की तरह बढ़ती है.

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