Mutual Fund से हुई मोटी कमाई, अब टैक्स भरने के लिए रहें तैयार, समझ लें पूरा कैल्कुलेशन

म्यूचुअल फंड के मामले में टैक्स सिर्फ कमाई गई रकम पर ही नहीं लगता है, बल्कि इंवेस्टमेंट अमाउंट और टाइम पीरिएड पर भी लगता है. इसलिए म्यूचुअल फंड में टैक्स कैल्कुलेशन करना सिरदर्दी से कम नहीं होता.

Published date india.com Published: February 18, 2026 11:08 PM IST
Mutual Fund से हुई मोटी कमाई, अब टैक्स भरने के लिए रहें तैयार, समझ लें पूरा कैल्कुलेशन
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर मिले गेन को 12 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5% का लॉन्ग टर्म गेन टैक्स लगता है.

नौकरी करने वाला हर शख्स यही चाहता है कि उसे कम से कम टैक्स देना पड़े. टैक्स सेविंग और इंवेस्टमेंट दिखाने के लिए ज्यादातर टैक्सपेयर्स म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं. म्यूचुअल फंड में बाकी स्कीमों की तुलना में कई ज्यादा रिटर्न तक देते हैं. लेकिन, म्यूचुअल फंड से मिले रिटर्न पर इनकम टैक्स भी देना पड़ता है. इसके अलावा और भी कई तरह के टैक्स लगते हैं.

हालांकि, म्यूचुअल फंड में टैक्स का कैलकुलेशन उतना आसान नहीं होता, जितना कि फिक्स्ड डिपॉजिट या रियल एस्टेट जैसे अन्य इंवेस्टमेंट में होता है. क्योंकि, म्यूचुअल फंड के मामले में टैक्स सिर्फ कमाई गई रकम पर ही नहीं लगता है, बल्कि इंवेस्टमेंट अमाउंट और टाइम पीरिएड पर भी लगता है. इसलिए म्यूचुअल फंड में टैक्स कैल्कुलेशन करना सिरदर्दी से कम नहीं होता.

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म्यूचुअल फंड्स पर कितना लगता है टैक्स?
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर लॉन्ग टर्म गेन यानी 12 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5% और शॉर्ट टर्म गेन यानी 12 महीने के भीतर बेचने पर 20% टैक्स देना होता है. अन्य स्कीमों पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा. कुछ खास तरह के फंड को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिल सकती है. वहीं, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के अनुसार डेट फंड्स पर टैक्स आपकी इनकम टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से लगता है.

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स
पहले म्यूचुअल फंड कंपनियां जो डिविडेंड देती थीं, उन पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स यानी DDT लगता था. डिविडेंड देने से पहले ही उस पर टैक्स काट लिया जाता था. इससे निवेशकों के हाथ में कम डिविडेंड आता था. लेकिन 1 अप्रैल 2020 से DDT को खत्म कर दिया गया है. अब डिविडेंड को ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्स’ माना जाता है. ऐसे निवेशकों को डिविडेंड से हुए इनकम को अपनी टैक्सेबल इनकम में शामिल करना होगा. इसपर टैक्स स्लैब के मुताबिक टैक्स लगेगा.

इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम में कैसे कैल्कुलेट होता है टैक्स?
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) म्यूचुअल फंड का एक बेहतरीन ऑप्शन है. इसमें निवेश पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत रिटर्न पर 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है. यानी, आप जितना ELSS में निवेश करते हैं, उतना कम टैक्स भरना पड़ता है.

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FIFO रूल का क्या है रोल?
अगर आपको म्यूचुअल फंड से अच्छी-खासी कमाई होती है, तो रिटर्न भरने से पहले FIFO को समझना जरूरी हो जाता है. FIFO यानी First In First Out. इसका मतलब है कि जब आप अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स बेचते हैं, तो सबसे पहले खरीदे गए यूनिट्स को बेचा हुआ माना जाता है. इसका सीधा असर इस बात पर होता है कि आपकी कमाई शॉर्ट टर्म गेन मानी जाएगी या लॉन्ग टर्म गेन. एक डीमैट अकाउंट इस प्रोसेस को आसान बना देता है. अगर आपने 200 यूनिट 2000 रुपये में खरीदे और उनमें से 150 यूनिट 3000 रुपये में बेचे, तो कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन 1500 रुपये होगी. इस पर आपको 1500 रुपये का कैपिटल गेन होगा.

SIP से हुई कमाई पर टैक्स कैसे बचाएं?

  • इसके लिए इक्विटी फंड्स में 12 महीने से पहले यूनिट्स बेचने से बचें.
  • SIP यूनिट्स को कम से कम 12 महीने होल्ड करें, ताकि STCG न लगे.
  • हर साल कम से कम 1.25 लाख रुपये तक के LTCG पर छूट का पूरा फायदा लें.
  • डेट फंड्स में 24 लाख तक LTCG छूट की प्लानिंग करें.
  • SIP करने से पहले टैक्स रूल्स को समझ लें.

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