नई दिल्ली। नंदन नीलेकणी को एकबार फिर इंफोसिस की कमान सौंपी गई है. विशाल सिक्का के सीईओ पद से इस्तीफा देने के बाद नीलेकणी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. विशाल सिक्का के बाद आर शेषैया और को-चेयर रवि वेकंटसन ने भी इस्तीफा दे दिया है.
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने आर शेषैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. Also Read - नंदन निलेकणी ने कहा- ऑनलाइन क्लासेज है अल्पावधि समाधान, स्कूलों को बाधाओं से पार पाने में बनाना होगा सक्षम  

शेषैया कंपनी के चेयरमैन और डायरेक्टर थे. उन्होंने तत्काल प्रभाव से अपने सभी पद छोड़ दिए हैं. विशाल सिक्का के साथ ही जेफरी लीमैन और जॉन एचमेंडी ने भी डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया है. Also Read - प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस के तीन कर्मचारी धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार

माना जा रहा है कि नीलेकणी पर कर्मचारी, ग्राहक और शेयरहोल्डर तीनों का भरोसा है. पिछले हफ्ते विशाल सिक्का के सीईओ पद से इस्तीफा देने के बाद एक निवेश सलाहकार कंपनी ने नंदन नीलेकणी को कंपनी के निदेशक मंडल में गैर कार्यकारी चेयरमैन के रूप में वापस लाए जाने की सलाह दी थी. नंदन नीलकेणी साल 2002 से 2007 तक इंफोसिस के सीईओ रह चुके हैं. नीलकेणी उन सात चर्चित संस्थापकों में से एक हैं जिन्होंने 80 के शुरुआती दशक में आईटी कंपनी इंफोसिस की स्थापना की थी. Also Read - इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद ऋषि सुनक बने ब्रिटेन के नये वित्त मंत्री

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व चेयरमैन एन.आर. नारायणमूर्ति बुधवार की शाम ग्लोबल इन्वेस्टर्स के साथ बात करने वाले थे, लेकिन खराब सेहत का हवाला देते हुए उन्होंने इसे 29 अगस्त तक टाल दिया है. सूत्रों का कहना है कि नीलेकणी के नाम पर चर्चा शुरू होने के कारण ही मूर्ति ने कॉन्फ्रेंस कॉल टाली है.

गौतलब है कि पिछले हफ्ते विशाल सिक्का के सीईओ पद से इस्तीफा देने के बाद कंपनी के शेयर 7.49% फीसदी लुढ़ककर 965 रुपये पर पहुंच गए थे. वहीं इस खबर के असर से प्रमुख सेंस्टिव इंडेक्स सेंसेक्स 0.58 फीसदी की गिरावट के साथ 185 अंक नीचे चला गया था.