New Gratuity Rules: देश के संगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को मोदी सरकार ने एक बड़ी राहत दी है. दरअसल, सरकार ने श्रम कानून में बदलाव के लिए संसद से एक विधेयक पास करवाया है जिसके तहत कई चीजें बदल गई हैं. इसी में से एक है ग्रेच्युटी का मसला. इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद अब कोई कर्मचारी एक साल की नौकरी करने के बाद भी कंपनी से ग्रेच्युटी पाने का हकदार हो जाएगा. पहले यह अवधि पांच साल की थी.

दरअसल, मोदी सरकार ने इस बारे में काफी पहले ही घोषणा कर दी थी, लेकिन अब संसद से विधेयक पास हो जाने के बाद इसका रास्ता साफ हो गया है. अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा. इसके बाद अगर कोई कर्मचारी किसी कंपनी में एक साल की सेवा के बाद नौकरी छोड़ देता है तो भी उसे ग्रेच्युटी मिलेगी. पहले यह नियम पांच साल के लिए था. यानी पांच साल की सेवा के बाद ही नौकरी छोड़ने पर कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार होता था.

कितनी मिलती है ग्रेच्युटी?

नियम के मुताबिक कंपनियों को अपने कर्मचारी को हर साल 15 दिन के वेतन के बराबर ग्रेच्युटी देनी होती है. वेतन में मूल और महंगाई भत्ता शामिल किया जाता है. इसके अलावे ग्रेच्युटी का हिसाब लगाते समय 26 दिन का एक महीना काउंट किया
जाता है. क्योंकि ऐसा माना जाता है कि एक कर्मचारी 30 दिन के महीने में अधिकतम 26 दिन ही काम करता है.

इस तरह मान लीजिए कि एक व्यक्ति का मासिक वेतन (मूल और महंगाई भत्ता मिलाकर) 50000 रुपये है और वह किसी कंपनी में एक साल तक काम करता है तो उसे कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी. इसके लिए 50000 को 26 से भाग कर उसे 15 से गुणा कर
दिया जाएगा. ऐसा करने पर उक्त व्यक्ति को 28846 रुपये मिलेंगे.

सरकार ने ग्रेच्युटी की ऊपरी सीमा भी तय कर रखी है. इसके तहत किसी व्यक्ति को ग्रेच्युटी के रूप में अधिकतम 20 लाख रुपये का भुगतान किया जा सकता है. इस संबंधिक श्रम सुधार विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से ट्विट किया कि यह लंबे समय से श्रमिकों की मांग थी. इन सुधारों से मेहनतकश मजदूरों की भलाई होगी.