
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
आज के दौर में महिलाएं किसी चीज़ में पीछे नहीं हैं. वो पुरुषों से कदम से कदम और कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं. लेकिन, वर्कप्लेस और काम पर आने के दौरान रास्ते में महिलाओं की सुरक्षा हमेशा से ही एक बड़ी चुनौती रही है. इसलिए ज्यादातर महिलाएं नाइट शिफ्ट करने से कतराती हैं. दिल्ली सरकार की ओर से महिलाओं के लिए बिजनेस फ्रेंडली माहौल बनाने के लिए और कामकाजी महिलाओं को नए मौके देने के लिए कुछ नियम बनाए हैं.
कब लागू हुआ था कानून
दिल्ली की पिछली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार में श्रम विभाग ने दिल्ली ऑक्युपेश्नल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन रूल्स-2023 यानी दिल्ली व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य से जुड़े हालात नियम-2023 लागू किया था. ये कानून बीजेपी सरकार बनने के बाद भी लागू है. इसमें प्राइवेट सेक्टर को शामिल नहीं किया गया है. ये नियम सिर्फ दुकान और बिजनेस प्रतिष्ठान के लिए है.
इस कानून के तहत दिल्ली में महिलाओं को शॉपिंग मॉल, शोरूम या किसी दुकान और कमर्शियल एरिया में 24x7 यानी किसी भी समय काम करने की छूट दी जा सकती है. इसके लिए पहले कुछ मानकों का पालन करना होगा. तभी यह मुमकिन हो पाएगा.
नाइट शिफ्ट की क्या है टाइमिंग?
दिल्ली दुकान व स्थापना अधिनियम-1954 में छूट दी जा रही है. इस एक्ट के सेक्शन 14, 15 और 16 के मुताबिक, महिलाओं को गर्मी के मौसम में रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक और सर्दी के मौसम में रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक नाइट शिफ्ट की परमिशन है.
दिल्ली में फीमेल स्टाफ के नाइट शिफ्ट को लेकर शर्तें
शॉप में 10 या ज्यादा महिलाएं होनी चाहिए अपॉइंट
दुकान और स्थापना अधिनियम, 1958 में किए गए संशोधन के आधार पर श्रम विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक महिलाएं काम कर सकेंगी. जहां महिलाएं रात में काम करेंगी, उस शॉप या शोरूम में कम से कम 10 या इससे ज्यादा महिलाएं अपॉइंट होनी चाहिए.
फैक्ट्री में एक-तिहाई कर्मचारी होना अनिवार्य
कारखानों के मामले में भी इसी तरह की व्यवस्था रहेगी. कारखाना अधिनियम की शक्तियों का उपयोग करते हुए 26 जून 2016 के नियमों को समाप्त कर यह तय किया है कि महिलाएं चाहें तो रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी कारखाने या प्रोडक्शन यूनिट में काम कर सकती हैं. कारखानों और प्रोडक्शन यूनिट्स में महिलाओं की नाइट शिफ्ट में काम करने के दौरान सुपरवाइजर, शिफ्ट इन-चार्ज, फोरमैन या अन्य सुपरवाइजर कर्मचारियों में कम से कम एक तिहाई महिला स्टाफ होना चाहिए.
नियम नहीं मानने पर कंपनी के खिलाफ लिया जाएगा एक्शन
अगर कोई कंपनी महिलाओं के नाइट शिफ्ट को लेकर बनाए गए नियमों को नहीं मानती है या इसमें लापरवाही बरतती है, तो इसे श्रम कानून के खिलाफ माना जाएगा. ऐसे में जुर्माना से लेकर जेल तक हो सकती है.
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