मुंबईः पंजाब नेशनल बैंक में अब तक के बैंकिंग सिस्टम का सबसे बड़ा घोटाला सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने कई कदम उठाए हैं. मंगलवार को इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए आरबीआई ने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) पर बड़ा फैसला लिया. आरबीआई ने बैंकों की ओर से आयात के लिए व्यापार कर्ज पर गारंटीपत्र (एलओयू) और भरोसा-पत्र (एलओसी) जारी करने पर मंगलवार को रोक लगा दी. Also Read - Bank Holidays in August 2020: अगस्त महीने में बैंकों की होने वाली है बंपर छुट्टी, जल्दी निपटाएं अपना काम

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गौरतलब है कि एलओयू ने माध्यम से ही हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके चाचा मेहुल चोकसी ने पंजाब नेशनल बैंक के साथ करीब 13 हजार करोड़ रुपए के कर्ज की धोखाधड़ी की थी. रिजर्व बैंक का कहना है कि गारंटीपत्र पर रोक लगाने का निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू है. आरबीआई ने एक अधिसूचना में कहा कि दिशा निर्देशों की समीक्षा के बाद आयात के लिए बैंकों द्वारा गारंटीपत्र जारी किए जाने की सुविधा पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है. Also Read - ‘सरकारी बैंकों का निजीकरण नहीं उनमें सरकारी हिस्सेदारी घटाकर 26 प्रतिशत करने की जरूरत’

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क्या होता है लेटर ऑफ अंडरटेकिंग

लेटर ऑफ अंडरटेकिंग एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक खातेदार को पैसा मुहैया कराते हैं. व्यापारी इसका इस्तेमाल विदेशों से सामान आयात करने के लिए करते हैं. यदि खातेदार डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाए का भुगतान करे. आरोप है कि पीएनबी के कर्मचारियों ने घोटाले को आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से स्विफ्ट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कंपनियों के पक्ष में एलओयू के मेसेज भेजे.

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आरबीआई ने शुरू किया अॉडिट

इससे पहले बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों से परेशान भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकारी बैंकों के विशेष ऑडिट की प्रक्रिया शुरू की थी. इस ऑडिट में मुख्य ध्यान व्यापारिक गतिविधियों के वित्तपोषणऔ रबैंकों द्वारा जारी किए जाने वाले गारंटी पत्रों (एलओयू) पर दिया जाना है. आरबीआई ने सभी बैंकों से उनके द्वारा जारी किए गए एलओयू की जानकारी मांगी है. इसमें बकाया राशि की जानकारी भी मांगी गई है.

इन बातों का रखा जाएगा ध्यान

आरबीआई यह भी देखेगा कि बैंकों के पास ऋण सीमा की पहले से अनुमति थी या नहीं और गारंटी पत्र जारी करने से पहले उनके पास पर्याप्त नकद मार्जिन उपलब्ध था या नहीं. हाल ही में उजागर पंजाब नेशनल बैंक-नीरव मोदी धोखाधड़ी मामले समेत अधिकतर बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी मामले व्यापार वित्तपोषण से जुड़े हैं. इसके अलावा जानबूझ कर ऋण नहीं चुकाने के भी कई मामले व्यापार वित्त पोषण से जुड़े रहे हैं.