नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को संसद में आर्थिक सर्वे (Economic survey 2019-2020) का लेखा जोखा संसद के पटल से देश के सामने रखा. आर्थिक सर्वे 2020 कहीं ने कहीं सरकार को मायूस करने वाला रहा और इसने जरूर मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन(five trillion economy) इकोनॉमी के सपने को एक गहरा घाव दिया है. अब बारी है आम बजट की आज वित्त मंत्री देश के सामने अगले एक साल के लिए आम बजट(Union Budget 2020-2021) पेश करने वाली है. ऐसे में यह देखना होगा कि क्या आर्थिक सर्वे से मिले घाव पर यूनियन बजट 2020 मरहम का काम करेगा या नहीं.

आर्थिक सर्वे में जहां अगले एक साल सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी(GDP) की रफ्तार 6 से 6.5 रहने की उम्मीद की गई जो कि एक विकासशील देश की आर्थिक प्रगति के लिए सुस्त रफ्तार है. अब पूरे देश और सरकार को वित्त मंत्री के आम बजट से काफी उम्मीद है. आम बजट में ज्यादातर यह साफ हो जाएगा कि सरकार एक बार फिर से कैसे देश की ग्रोथ रेट को प्रगति प्रदान करती है.

आज के आम बजट में देश का हर एक तब सरकार से उम्मीद लगाए हुए जहा आम आदमी को उम्मीद है कि मंहगाई की मार से राहत मिलेगी तो वहीं व्यापारी वर्ग बिजनेस में टैक्स राहत संबंधी घोषणाओं की उम्मीद कर रहा है. अगर यूथ की बात करें तो लोग सोच रहे हैं कि सरकार आने वाले वित्तीय वर्ष में कुछ ऐसे कदम उठाएगी जिससे नए रोजगारों की संभावनाए बढ़ें.

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आज के बजट में सरकार रेवेन्यू कलेक्शन के उपायों पर भी जोर दे सकती है. हालांकि सरकार के पास इस सेक्टर में ज्यादा ऑप्शन मौजूद नहीं हैं ऐसे में देखना होगा कि क्या वह विनिवेश पर ज्यादा ध्यान देती है. सरकार एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) और इन्वेस्टमेंट होल्डिंग कंपनियों (Investment Holding Companies) के जरिए फंड में इजाफा कर सकती है.

यूनियन बजट में जिस बात पर सबका ध्यान रहेगा वह है इनकम टैक्स स्लैब. आज के बजट से सैलरी क्लास के लोग जरूर यह उम्मीद लगाएंगे सरकार उन्हे टैक्स में कुछ राहत दे. ऐसा इसलिए भी है कि पहले की अपेक्षा बाजार में मांग कम हुई है और पिछले साल ही सरकार ने कारपोरेट टैक्स में छूट दी थी.

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सरकार के लिए ऑटो सेक्टर एक काफी चैलेंचिंग पार्ट होने वाला है पिछले कई महीनों से पूरा आटोमोबाईल बदहाल पड़ा हुआ. वैश्विक मंदी की सबसे ज्यादा मार इसी सेक्टर पर पड़ी है. अब देखना होगा इस हालत से ऑटोमोबाइल सेक्टर को उबारने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाती है.

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माना जा रहा है कि भारत की वित्त मंत्री एक महिला है इसलिए उम्मीद है कि महिलाओं के बारे में भी आज के यूनियन बजट में ध्यान रखा जाएगा. इस बार सरकार महिलाओं के प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम के बजट को बढ़ा सकती है और साथ ही महिला सशक्तीकरण कार्यक्रमों को बढ़ा सकती है.