NPS, PPF या म्यूचुअल फंड में निवेश? सेफ रिटायरमेंट के लिए कौन देगा ज्यादा बेनिफिट, समझ लें ये कैल्कुलेशन

बात जब रिटायरमेंट प्लान की आती है, तो मार्केट में इंवेस्टमेंट के कई ऑप्शन हैं. लेकिन, सही फाइनेंशियल स्ट्रैटजी और सही प्लान चुनकर आप अपने रिटायरमेंट के लिए मोटा फंड बना सकते हैं.

Published date india.com Published: September 18, 2025 10:13 PM IST
NPS, PPF या म्यूचुअल फंड में निवेश? सेफ रिटायरमेंट के लिए कौन देगा ज्यादा बेनिफिट, समझ लें ये कैल्कुलेशन
स्मार्ट इंवेस्टमेंट का दूसरा ऑप्शन नेशनल पेंशन स्कीम यानी NPS है.

हर किसी को नौकरी के बाद रिटायरमेंट लाइफ की फिक्र रहती है. कुछ लोग अपने रिटायरमेंट लाइफ के लिए सेविंग करके रखते हैं. लेकिन सिर्फ पैसे जोड़ना ही काफी नहीं है. इस पैसे से पैसा बनाने की तरकीब भी पता होनी चाहिए. ताकि, रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी आराम से गुजारने के लिए हमें पैसों की कमी का सामना न करना पड़े.

बात जब रिटायरमेंट प्लान की आती है, तो मार्केट में इंवेस्टमेंट के कई ऑप्शन हैं. लेकिन, सही फाइनेंशियल स्ट्रैटजी और सही प्लान चुनकर आप अपने रिटायरमेंट के लिए मोटा फंड बना सकते हैं. रिटायरमेंट प्लान की बात की जाए, तो पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) और म्यूचुअल फंड अच्छे ऑप्शन हैं. अक्सर लोग इनमें कंफ्यूज हो जाते हैं और तय नहीं कर पाते कि उनके लिए कौन सी स्कीम सही है.

आइए समझते हैं कि सेफ रिटायरमेंट के लिए NPS, PPF या म्यूचुअल फंड में कौन सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है:-

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF)
फिक्स्ड डिपॉजिट का सबसे बढ़िया तोड़ PPF बनता जा रहा है. PPF सरकार की सेविंग स्कीम है. इसमें जीरो पर्सेंट रिस्क होता है. यानी आपका पैसा बिल्कुल सेफ है. PPF में निवेश EEE की कैटेगिरी में आता है. इस स्कीम में आपको इनकम टैक्स में छूट का पूरा फायदा मिलता है.मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी कोई टैक्स नहीं देना होता. इसमें निवेश का लॉकिंग पीरिएड 15 साल का होता है. इस समय 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है.मिनिमम निवेश की रकम 500 रुपये रखी गई है. एक साल में मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये निवेश किया जा सकता है. अगर पैसों की तंगी है, तो एक फाइनेंशियल ईयर में मैक्सिमम 12 इंस्टॉलमेंट में पैसे जमा करा सकते हैं. PPF अकाउंट पर आपको इमरजेंसी के समय लोन भी मिलता है.

नेशनल पेंशन स्कीम (NPS)
स्मार्ट इंवेस्टमेंट का दूसरा ऑप्शन नेशनल पेंशन स्कीम यानी NPS है. ये लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट स्कीम है. भारत सरकार ने साल 2004 में लॉन्च किया था. इसका मकसद लोगों को रिटायरमेंट के बाद एक स्थायी और भरोसेमंद इनकम देना है. इस स्कीम को पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) रेगुलेट करती है. इसमें रेगुलर इंवेस्टमेंट से आप अपने बुढ़ापे के लिए या अपने बच्चों के भविष्य के लिए बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं. आप मिनिमम 1000 रुपये से इंवेस्टमेंट शुरू कर सकते हैं.मैक्सिमम लिमिट तय नहीं है. इसमें सालाना 2 लाख रुपये तक की टैक्स रिलीफ मिलती है.इसमें EPF और PPF से ज्यादा रिटर्न मिलने की गुंजाइश रहती है.

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इक्विटी म्यूचुअल फंड्स
जब बाद स्मार्ट इंवेस्टमेंट की हो, तो म्यूचुअल फंड्स से बेस्ट और कुछ नहीं हो सकता. इसमें आपको 12 से 15% का रिटर्न मिलता है. रिटर्न कितना बेहतर होगा, ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कौन सा म्यूचुअल फंड चुनते हैं. वैसे तो म्यूचुअल फंड 4 तरह के होते हैं-इक्विटी, डेट, इंडेक्स और हाइब्रिड. इनमें इक्विटी म्यूचुअल फंड ज्यादा चर्चा में रहता है से एक्टिवली मैनेज्ड फंड भी कहा जाता है, जहां फंड मैनेजर रिसर्च और एनालिसिस के बेसिस पर स्टॉक चुनते हैं.इस कैटेगरी में सेक्टर फंड, थीमैटिक फंड और डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स आते हैं.अगर आप रिटर्न की उम्मीद करते हैं, तो आपको इक्विटी फंड चुनना चाहिए. इसमें प्रोफेशनल तरीके से मैनेजमेंट होता है. हालांकि, इस फंड में निवेश की रकम ज्यादा होती है. ऐसे में एग्जिट लोड भी रहता है.

रिटायरमेंट के लिए कौन सी स्कीम बेहतर?
NPS, म्यूचुअल फंड या PPF तीनों अलग-अलग बेनिफिट देते हैं. सही ऑप्शन चुनना आपके फाइनेंशियल टार्गेट पर निर्भर करता है. अगर आप टैक्स बेनिफिट और रिटायरमेंट के बाद गारंटीड इनकम चाहते हैं, तो NPS चुनें. अगर आप फ्लेक्सिबल, लिक्विडिटी और लॉन्ग टर्म में ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड में निवेश करिए. अगर आप इंवेस्टमेंट पर बिल्कुल भी रिस्क नहीं लेना चाहते और फिक्स्ड रिटर्न चाहते हैं, तो आपके लिए PPF बेस्ट रहेगा.

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