भुवनेश्वर: ओडिशा ने सोमवार को अपने ‘रसगुल्ले’ के लिए बहुप्रतीक्षित भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग हासिल किया. बता दें कि इसके पहले पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच इस पर अपने-अपने दावे थे, लेकिन बंगाल को जीआई का टैग 2017 में ही मिल गया था. बता दें कि जीआई टैग किसी वस्तु के किसी खास क्षेत्र या इलाके में विशेष होने की मान्यता देता है. Also Read - तमिलनाडु के बंगाल में खुलने जा रहे सिनेमाघर, 100 फीसदी क्षमता के साथ खोलने का आदेश जारी

सूत्रों ने बताया कि भौगोलिक संकेत रजिस्ट्रार, चेन्नई ने वस्तु भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण), कानून 1999 के तहत इस मिठाई को ओडिशा रसगुल्ला के तौर पर दर्ज करने का प्रमाणपत्र जारी किया. यह प्रमाणपत्र 22 फरवरी 2028 तक वैध रहेगा. Also Read - PM मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भतीजी प्रोफेसर चित्रा घोष के निधन पर जताया शोक, फोटो शेयर कर किया याद

‘रसगुल्ला’ भगवान जगन्नाथ के लिए निभाई जाने वाली राज्य की सदियों पुरानी परंपराओं का हिस्सा रहा है और इसका जिक्र 15वीं सदी के उड़िया काव्य दांडी रामायण में भी मौजूद है. Also Read - BCCI President सौरभ गांगुली अस्‍पताल से हुए डिस्‍चार्ज, बोले- डॉक्‍टरों को धन्‍यवाद, मैं पूरी तरह से ठीक हूं

साल 2015 से, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच रसगुल्ले की शुरुआत को लेकर जंग चल रही है. बंगाल को 2017 में उसके ‘रसगुल्ले’ के लिए जीआई टैग प्राप्त हुआ था.

इसके अगले साल, ओडिशा लघु उद्योग निगम लिमिटेड (ओएसआईसी) ने रसगुल्ला कारोबारियों के समूह उत्कल मिष्ठान व्यावसायी समिति के साथ मिलकर ‘ओडिशा रसगुल्ले’ को जीआई टैग देने के लिए आवेदन किया था.

इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रदीप्त नाइक ने कहा कि राज्य को यह टैग बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था. भाजपा नेता ने कहा, इसे मिलने में राज्य सरकार की लापरवाही के कारण देरी हुई.