UPS या NPS.... टेंशन फ्री रिटायरमेंट लाइफ के लिए कौन सी स्कीम बेहतर, क्या हैं इनके फायदे-नुकसान, समझ लें पूरा गुणा-गणित

2003 में ओल्ड पेंशन स्कीम बंद होने के बाद सरकारी कर्मचारियों के पास अब पेंशन के लिए 2 ऑप्शन- यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) हैं. NPS लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट इंवेस्टमेंट स्कीम है, जबकि UPS को OPS और NPS का मिलाजुला रूप कहा जाता है. आइए समझते हैं रिटायरमेंट के बाद गारंटीड और स्टेबल इनकम के लिए आपको कौन सी स्कीम चुननी चाहिए:-

Published date india.com Updated: September 15, 2025 4:21 PM IST
UPS या NPS.... टेंशन फ्री रिटायरमेंट लाइफ के लिए कौन सी स्कीम बेहतर, क्या हैं इनके फायदे-नुकसान, समझ लें पूरा गुणा-गणित
Unified Pension Scheme BIG UPDATE: All new central govt employees who want to join UPS must submit..., PFRDA issues deadline for...

जब बात रिटायरमेंट लाइफ और पेंशन की आती है, तो सही प्लान चुनना बेहद जरूरी हो जाता है. सरकार नागरिकों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देने के मकसद से कई तरह के प्लान ऑपरेट करती हैं. नेशनल पेंशन सिस्टम जहां सभी तरह के सैलरीड क्लास (सरकारी या गैर-सरकारी) के लिए है. यूनिफाइड पेंशन स्कीम सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है. वहीं, अटल पेंशन योजना (APY) छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाई गई है. इसके अलावा असंगठित श्रमिकों के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PM-SYM), गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले सीनियर सिटीजन के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOPAS) चलाई जाती हैं.

सरकारी कर्मचारियों के पेंशन की बात हो, तो उनके पास पहले सिर्फ ओल्ड पेंशन स्कीम ही थी. लेकिन, अब उनके पास 2 ऑप्शन- यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) हैं. साल 2004 में ओल्ड पेंशन स्कीम की जगह पर NPS लाया गया था. फिर केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS 1 अप्रैल 2025 से लागू किया. केंद्र सरकार के कर्मचारी चाहें तो NPS में पहले की तरह बने रह सकते हैं या फिर UPS में स्विच कर सकते हैं. NPS से UPS में स्विच करने की डेडलाइन पहले 30 जून रखी गई थी. बाद में इसे 30 सितंबर तक बढ़ा दिया गया है.

आइए समझते हैं कि OPS, NPS और UPS में क्या है फर्क? आपके लिए कौन सी पेंशन स्कीम फायदेमंद है:-

ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS)
साल 2004 से पहले सभी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम लागू थी. यह निश्चित गारंटीड पेंशन योजना थी, जिसमें नौकरी की लास्ट सैलरी और सर्विस पीरियड के बेसिस पर लाइफ टाइम पेंशन मिलता था.

OPS की खास बातें

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  • OPS रिटायर्ड कर्मचारियों को लास्ट सैलरी का 50% पेंशन के रूप में देने का वादा करती थी.
  • पेंशन पाने वाले कर्मचारियों को साल में 2 बार डेली अलाउंस में बदलाव करने का बेनिफिट भी मिलता था.
  • अगर पेंशन पाने वाले कर्मचारी की मौत हो जाती थी, तो उसके परिवार को पेंशन बेनिफिट मिलता रहता था.
  • OPS के तहत, कर्मचारियों को अपनी सैलरी से कुछ भी नहीं देना पड़ता था. सरकार पेंशन की पूरी रकम का पेमेंट करती थी.

OPS क्यों बंद किया गया?
OPS की वजह से सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ रहा था. इसलिए साल 2004 में ओल्ड पेंशन स्कीम को बंद कर दिया. इसकी जगह पर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लाया गया.

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS को भारत सरकार ने साल 2004 में लॉन्च किया था. यह एक लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट इंवेस्टमेंट स्कीम है, जो न सिर्फ रिटायरमेंट के बाद की फाइनेंशियल सिक्योरिटी देती है, बल्कि टैक्स सेविंग और मार्केट से जुड़ी ग्रोथ का मौका भी देती है. इस स्कीम को पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) रेगुलेट करती है. शुरुआत में यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए थी, लेकिन 2009 में इसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए खोल दिया गया. कोई भी भारतीय नागरिक अकाउंट NPS अकाउंट खुलवा सकता है. इसके लिए उसकी उम्र 18 साल से 70 साल के बीच होनी चाहिए. नौकरीपेशा, व्यापारी, फ्रीलांसर, स्वरोजगार से जुड़े लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं.

NPS की खास बातें

  • NPS को सरकारी कर्मचारियों की पेंशन के साथ-साथ एक इंवेस्टमेंट प्लान की तरह शुरू किया गया.
  • NPS के तहत कर्मचारी कई बैंकों, वित्तीय संस्थानों और प्राइवेट कंपनियों के जरिए कई स्कीमों में निवेश कर सकते हैं. ICICI, SBI, HDFC जैसी बैंक और LIC कुल 9 पेंशन फंड मैनेजर्स ये स्कीम प्रोवाइड करते हैं.
  • हाई रिस्क के बावजूद भी इन स्कीम में निवेश पर 15% तक ही रिटर्न मिलता है. घाटा होने पर नुकसान भी हो सकता है.
  • NPS के तहत कर्मचारी की सैलरी और DA का 10% पैसा कटता रहता है. सरकार भी कर्मचारी की सैलरी का 14% हिस्सा अपने पास से उसके फंड में जमा करती जाती है. इस फंड का एक हिस्सा कर्मचारी किसी भी समय निकाल सकता है.
  • अगर फंड का 60% तक पैसा निकाला जाए तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगता है. बाकी 40% पैसा एन्युटी प्लान में निवेश कर दिया जाता है. चूंकि इस रकम का निवेश शेयर मार्केट में हो रहा है, इसलिए यह बढ़ भी सकती है और घट भी सकती है.
  • इस 40% रकम में संभव घटाव-बढ़ाव के बाद फंड में बची कुल रकम रिटायरमेंट के बाद एक रेगुलर इनकम के तौर पर कर्मचारी को मिलती रहती है.
  • NPS में 1,000 रुपये महीने से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं. मैक्सिमम लिमिट तय नहीं है.
  • इससे सालाना 2 लाख रुपये तक की टैक्स रिलीफ मिलती है. इस स्कीम को आप अपनी 65 साल की उम्र तक चालू रख सकते हैं.

मौजूदा NPS में ऐसी क्या खामियां हैं, जिसके लिए इसका विरोध होता रहा है?

  • NPS का विरोध करने वाले कर्मचारियों का तर्क था कि NPS के तहत पेंशन शेयर मार्केट पर निर्भर होती है. शेयर मार्केट में पेंशन का एक हिस्सा निवेश करने पर फायदा नहीं हुआ, जाहिर तौर पर पेंशन कम हो जाएगी.
  • इसके साथ ही NPS के तहत कर्मचारियों को सैलरी से पैसा कटवाना पड़ रहा है, जबकि OPS में बिना पैसा कटे एक मुश्त रकम पेंशन में मिल जाती थी.
  • वहीं, OPS को डिफाइंड बेनिफिट पेंशन स्कीम यानी DBPS कहा जाता है. NPS को डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूशन पेंशन स्कीम यानी DCPS कहा जाता है. मतलब OPS को बेनिफिट मना जाता है और NPS को कॉन्ट्रिब्यूशन. इसलिए इसका विरोध होता रहा है.

यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)
NPS को लेकर लगातार कई तरह के सवाल उठ रहे थे. इसके खिलाफ देश में प्रदर्शन भी हो रहे थे. ऐसे में सरकार की तैयारी एक नया पेंशन प्लान लाने की थी. ये वास्तव में OPS और NPS का मिलाजुला रूप ही था. मोदी सरकार ने अप्रैल 2023 में टीवी सोमनाथन की अगुआई में एक कमेटी बनाई थी. इस कमेटी ने हर राज्य के वित्तीय सचिव, नेताओं, सैकड़ों कर्मचारी यूनियन के साथ चर्चा की. फिर मौजूदा पेंशन स्कीम में बदलाव के लिए कुछ सिफारिशें कीं. इसके बाद 24 अगस्त 2024 को मोदी सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS को मंजूरी दी है. 1 अप्रैल 2025 से इसे लागू किया गया है.

यूनिफाइड पेंशन स्कीम की खास बातें

  • ये सरकारी कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना है. इसके तहत कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद सुनिश्चित पेंशन दी जाएगी.
  • पेंशन की रकम रिटायरमेंट के पहले के 12 महीने के एवरेज बेसिक पे की 50% होगी. यानी अगर किसी कमर्चारी को उसकी नौकरी के आखिरी साल में 50 हजार रुपये बेसिक पे मिलती थी तो उसे रिटायरमेंट के बाद हर महीने 25 हजार रुपये पेंशन मिलेगी.
  • औसत बेसिक पे की 50% पेंशन उन्हें मिलेगी, जिन्हें नौकरी करते हुए 25 या उससे ज्यादा साल हो गए हैं. 25 साल से कम और 10 साल से ज्यादा सर्विस होने पर उसी रेशियो में पेंशन बनेगा.
  • अगर किसी कर्मचारी ने 10 साल से ज्यादा और 25 साल से कम नौकरी की है, तो उसकी बेसिक पे भले ही कितनी कम हो, उसे पेंशन में कम से कम 10 हजार रुपये जरूर मिलेंगे. इसमें इन्फ्लेशन यानी महंगाई भी जोड़ी जाएगी.
  • अगर किसी कर्मचारी की मौत हो जाती है, तो उसके परिवार को पेंशन (अगर कर्मचारी उस समय रिटायर हो गया होता तो उसे जो पेंशन मिलती) का 60% मिलेगा. साथ ही परिवार को मिनिमम डियरनेस रिलीफ का पैसा (DA) भी मिलेगा. यह डियरनेस रिलीफ AICPI-W यानी ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स के अनुसार मिलेगा.
  • UPS के तहत सरकार हर कर्मचारी को उसकी हर 6 महीने की नौकरी पूरी करने पर, इन महीनों की उसकी सैलरी और DA का 10% पैसा, रिटायरमेंट के बाद लम-सम अमाउंट के बतौर देगी. यानी अगर किसी कर्मचारी ने 10 साल 3 महीने नौकरी की है, तो उसे 10 साल की सैलरी और DA का 10% बतौर लम-सम अमाउंट दिया जाएगा.

सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ही UPS
UPS अभी सिर्फ करीब 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के लिए है. भविष्य में राज्य भी चाहें तो इस योजना के प्रावधानों को अपने यहां लागू कर सकते हैं. अगर सभी राज्य इसे अपना लें तो राज्य और केंद्र मिलाकर कुल 90 लाख कर्मचारी इसके दायरे में आ जाएंगे.

NPS और UPS में फर्क

  • NPS के तहत अब तक पेंशन देने के लिए कमर्चारी अपनी सैलरी का 10% पैसा कटवाते थे. UPS के तहत कर्मचारी अभी भी 10% हिस्सेदारी देते रहेंगे.
  • सरकार हर तीन साल पर रिव्यू के बेसिस पर अपनी हिस्सेदारी में बदलाव कर सकती है, लेकिन कर्मचारियों की 10% की हिस्सेदारी जस की तस रहेगी.
  • NPS में सरकार पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन का 14% पैसा अपने पास से देती थी. अब UPS में सरकार ने अपनी हिस्सेदारी 14% से बढ़ाकर 18.5% कर दिया है.
  • NPS के तहत कर्मचारी की मौत के बाद घर वालों को मिलने वाली पेंशन की रकम तय नहीं थी. UPS के तहत इसे पेंशन का 60% कर दिया गया है.
  • UPS में कम सर्विस वाले कर्मचारियों के लिए मिनिमम पेंशन के तहत 10 हजार रुपये भी तय कर दिए हैं. NPS में ऐसा कोई नियम नहीं था.

सरकारी कर्मचारी के लिए कौन सी स्कीम बेहतर?
अगर आप गारंटीड और स्टेबल पेंशन चाहते हैं. मार्केट रिस्क नहीं लेना चाहते हैं, तो UPS एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. आप अलग से इंवेस्टमेंट के तौर पर इक्विटी या किसी सरकारी स्कीम में भी इंवेस्ट कर सकते हैं, ताकि रिटायरमेंट के बाद इनकम के दूसरे रास्ते भी खुले रहें. वहीं, अगर आपको हाई रिटर्न चाहिए और आप मार्केट को समझते हैं, तो NPS अच्छा काम कर सकता है. लेकिन, अगर आप सरकार की ओर से पूरा पेंशन चाहिए और आप OPS में शामिल होने के पात्र हैं, तो OPS में ही बने रहा समझदारी होगी.

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