
Anjali Karmakar
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से मास कॉम में मास्टर्स डिग्री. 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव. पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल न्यूज, बिजनेस और स्पोर्ट्स में खास दिलचस्पी. दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, ... और पढ़ें
जब बात रिटायरमेंट लाइफ और पेंशन की आती है, तो सही प्लान चुनना बेहद जरूरी हो जाता है. सरकार नागरिकों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देने के मकसद से कई तरह के प्लान ऑपरेट करती हैं. नेशनल पेंशन सिस्टम जहां सभी तरह के सैलरीड क्लास (सरकारी या गैर-सरकारी) के लिए है. यूनिफाइड पेंशन स्कीम सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है. वहीं, अटल पेंशन योजना (APY) छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाई गई है. इसके अलावा असंगठित श्रमिकों के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PM-SYM), गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले सीनियर सिटीजन के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOPAS) चलाई जाती हैं.
सरकारी कर्मचारियों के पेंशन की बात हो, तो उनके पास पहले सिर्फ ओल्ड पेंशन स्कीम ही थी. लेकिन, अब उनके पास 2 ऑप्शन- यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) हैं. साल 2004 में ओल्ड पेंशन स्कीम की जगह पर NPS लाया गया था. फिर केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS 1 अप्रैल 2025 से लागू किया. केंद्र सरकार के कर्मचारी चाहें तो NPS में पहले की तरह बने रह सकते हैं या फिर UPS में स्विच कर सकते हैं. NPS से UPS में स्विच करने की डेडलाइन पहले 30 जून रखी गई थी. बाद में इसे 30 सितंबर तक बढ़ा दिया गया है.
आइए समझते हैं कि OPS, NPS और UPS में क्या है फर्क? आपके लिए कौन सी पेंशन स्कीम फायदेमंद है:-
ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS)
साल 2004 से पहले सभी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम लागू थी. यह निश्चित गारंटीड पेंशन योजना थी, जिसमें नौकरी की लास्ट सैलरी और सर्विस पीरियड के बेसिस पर लाइफ टाइम पेंशन मिलता था.
OPS की खास बातें
OPS क्यों बंद किया गया?
OPS की वजह से सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ रहा था. इसलिए साल 2004 में ओल्ड पेंशन स्कीम को बंद कर दिया. इसकी जगह पर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लाया गया.
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS को भारत सरकार ने साल 2004 में लॉन्च किया था. यह एक लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट इंवेस्टमेंट स्कीम है, जो न सिर्फ रिटायरमेंट के बाद की फाइनेंशियल सिक्योरिटी देती है, बल्कि टैक्स सेविंग और मार्केट से जुड़ी ग्रोथ का मौका भी देती है. इस स्कीम को पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) रेगुलेट करती है. शुरुआत में यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए थी, लेकिन 2009 में इसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए खोल दिया गया. कोई भी भारतीय नागरिक अकाउंट NPS अकाउंट खुलवा सकता है. इसके लिए उसकी उम्र 18 साल से 70 साल के बीच होनी चाहिए. नौकरीपेशा, व्यापारी, फ्रीलांसर, स्वरोजगार से जुड़े लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं.
NPS की खास बातें
मौजूदा NPS में ऐसी क्या खामियां हैं, जिसके लिए इसका विरोध होता रहा है?
यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)
NPS को लेकर लगातार कई तरह के सवाल उठ रहे थे. इसके खिलाफ देश में प्रदर्शन भी हो रहे थे. ऐसे में सरकार की तैयारी एक नया पेंशन प्लान लाने की थी. ये वास्तव में OPS और NPS का मिलाजुला रूप ही था. मोदी सरकार ने अप्रैल 2023 में टीवी सोमनाथन की अगुआई में एक कमेटी बनाई थी. इस कमेटी ने हर राज्य के वित्तीय सचिव, नेताओं, सैकड़ों कर्मचारी यूनियन के साथ चर्चा की. फिर मौजूदा पेंशन स्कीम में बदलाव के लिए कुछ सिफारिशें कीं. इसके बाद 24 अगस्त 2024 को मोदी सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS को मंजूरी दी है. 1 अप्रैल 2025 से इसे लागू किया गया है.
यूनिफाइड पेंशन स्कीम की खास बातें
सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ही UPS
UPS अभी सिर्फ करीब 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के लिए है. भविष्य में राज्य भी चाहें तो इस योजना के प्रावधानों को अपने यहां लागू कर सकते हैं. अगर सभी राज्य इसे अपना लें तो राज्य और केंद्र मिलाकर कुल 90 लाख कर्मचारी इसके दायरे में आ जाएंगे.
NPS और UPS में फर्क
सरकारी कर्मचारी के लिए कौन सी स्कीम बेहतर?
अगर आप गारंटीड और स्टेबल पेंशन चाहते हैं. मार्केट रिस्क नहीं लेना चाहते हैं, तो UPS एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. आप अलग से इंवेस्टमेंट के तौर पर इक्विटी या किसी सरकारी स्कीम में भी इंवेस्ट कर सकते हैं, ताकि रिटायरमेंट के बाद इनकम के दूसरे रास्ते भी खुले रहें. वहीं, अगर आपको हाई रिटर्न चाहिए और आप मार्केट को समझते हैं, तो NPS अच्छा काम कर सकता है. लेकिन, अगर आप सरकार की ओर से पूरा पेंशन चाहिए और आप OPS में शामिल होने के पात्र हैं, तो OPS में ही बने रहा समझदारी होगी.
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