नई दिल्ली: बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों से परेशान जनता को थोड़ी राहत मिली है. लगातार चौथे दिन तेल की कीमतें घटी हैं. रविवार को दिल्ली में पेट्रोल में 25 पैसे वहीं डीजल में 17 पैसे की कटौती की गई. आज राजधानी में पेट्रोल 81.74 और डीजल 75.19 रुपए प्रतिलीटर मिल रहा है. आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल में 25 पैसे जबकि डीजल पर प्रतिलीटर 18 पैसे की कटौती की गई है. शनिवार को भी पेट्रोल और डीजल के दाम में लगातार तीसरे दिन कटौती देखने को मिली थी. दिल्ली में पेट्रोल में जहां 39 पैसे की कटौती की गई थी, वहीं डीजल 12 पैसे प्रति लीटर सस्ता हो गया था. दिल्ली में पेट्रोल 81.99 वहीं डीजल 75.36 रुपए प्रतिलीटर बिका. मुंबई में पेट्रोल 38 पैसे सस्ता होकर 87.46 रुपए प्रतिलीटर जबकि डीजल 13 पैसे सस्सा होकर 79 रुपए प्रतिलीटर मिल बिका.

वहीं शुक्रवार को पेट्रोल 24 पैसे तो डीजल के दाम में 10 पैसे की कटौती की गई थी. मुंबई में डीजल के दाम में 11 पैसे की कटौती की गई थी. पेट्रोल और डीजल के मूल्य में गुरुवार को भी कटौती की गई. उत्पादन लागत के नीचे आने के कारण पिछले दो माह में पहली बार ये कमी की गई थी. सरकारी खुदरा दुकानदारों की ओर से जारी विज्ञप्ति में पेट्रोल के 21 पैसे और डीजल के 11 पैसे प्रति लीटर सस्ती होने की बात कही गई थी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में गिरावट के बाद पहली बार मूल्यों में कटौती की गई थी.

भारत ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से तेल और गैस के दाम जिम्मेदारी पूर्ण तरीके से तय करने को कहा था. भारत ने बुधवार को कहा कि तेल एवं गैस कीमतों में हालिया वृद्धि बाजार की बाजार के मूल सिद्धान्त से अलग हैं और इससे आयातक देशों को नुकसान हो रहा है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है.

कच्चे तेल की कीमतें चार साल के उच्चस्तर पर जाने और रुपये में गिरावट के दोहरे प्रभाव से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं. भारत और ओपेक के बीच वार्षिक संस्थागत वार्ता में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आयात देशों का दृष्टिकोण रखा. दुनिया में कुल कच्चे तेल उत्पादन में ओपेक देशों की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है.

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 83 प्रतिशत आयात करता है. इनमें से 85 प्रतिशत ओपेक देशों से आता है. वहीं 80 प्रतिशत गैस का आयात इन देशों से किया जाता है. भारत मानता है कि कच्चे तेल की कीमत और उपलब्धता तय करने में ओपेक की महत्वपूर्ण भूमिका है. कच्चे तेल की कीमतों में जो मौजूदा उछाल का सिलसिला चल रहा है उससे कई देशों की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हुई है.