Pradhnmantri Gramin Awas Yojana: पहले इस योजना को इंदिरा आवास योजना (Indira Awas Yojana) के नाम से जाना जाता था. भारत में ग्रामीण गरीबों के लिए आवास प्रदान करने के लिए भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक सामाजिक कल्याण कार्यक्रम है. शहरी गरीबों के लिए इसी तरह की योजना 2015 में 2022 तक सभी के लिए आवास के रूप में शुरू की गई थी.Also Read - Pariksha Pe Charcha 2022: परीक्षा पे चर्चा के लिये रजिस्‍ट्रेशन की आज आखिरी तारीख, जल्‍दी करें

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ग्रामीण, व्यक्ति अपने वार्ड सदस्य से संपर्क कर सकते हैं या ग्राम पंचायत का दौरा कर सकते हैं. ये प्राधिकरण इस योजना के तहत आवेदन से संबंधित विवरण बताएंगे. व्यक्तियों को संबंधित ग्राम पंचायतों से उपलब्ध पीएमएवाई आवेदन पत्र भी भरना होगा. Also Read - 73rd Republic Day: PM मोदी ने नेशनल मेमोरियल वॉर पहुंचकर शहीदों को किया नमन

पीएम आवास योजना 2021 के लिए कैसे करें ऑनलाइन आवेदन?

  • Pmaymis.gov.in के माध्यम से PMAY योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
  • लॉग इन करें: pmay.gov.in पर जाएं. …
  • श्रेणी का चयन करें: वेबसाइट पर मेनू पर ‘नागरिक मूल्यांकन’ पर क्लिक करें. …
  • आधार/वर्चुअल आईडी नंबर चेक करें…
  • फॉर्म भरें: आधार / वर्चुअल आईडी नंबर पूरा करने के बाद.

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (Pradhan Mantri Awas Yojana-Gramin) को जारी रखने को बुधवार को मंजूरी दे दी. इसके तहत इसे मार्च 2021 से मार्च 2024 तक बढ़ाने की बात कही गई है. कैबिनेट बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने संवाददाताओं को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में सभी को आवास सुनिश्चित किया जा सकेगा.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में ग्रामीण क्षेत्रों में सभी को आवास के संबंध में आकलन किया गया था कि 2.95 करोड़ लोगों के पक्के मकान की जरूरत होगी. इसमें बड़ी संख्या में परिवारों को आवास प्रदान किये गए हैं. ठाकुर ने कहा कि शेष परिवारों को भी आवास मिल सके, इसके लिये इस योजना को 2024 तक जारी रखने का निर्णय किया गया है.

सरकारी बयान के अनुसार, इस योजना के तहत शेष 1.55 करोड़ मकानों के निर्माण के लिये वित्तीय प्रभाव 2.17 करोड़ रुपये आयेगा जिसमें केंद्र की हिस्सेदारी 1.25 लाख करोड़ रुपये तथा राज्य की हिस्सेदारी 73,475 करोड़ रुपये होगी. इसके तहत नाबार्ड को अतिरिक्त ब्याज के पुन:भुगतान के लिये 18,676 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जरूरत होगी.