क्या है PM धन धान्य कृषि योजना? इससे किसानों को कैसे मिलेगा फायदा? यहां जानिए सारी डिटेल

PM Dhan Dhanya Krishi Yojana:प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के जरिए सरकार छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर बढ़ाने की कोशिश करेगी. इससे कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी. किसानों को अलग-अलग फसलें उगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा.

Published date india.com Published: July 17, 2025 8:50 PM IST
क्या है PM धन धान्य कृषि योजना? इससे किसानों को कैसे मिलेगा फायदा? यहां जानिए सारी डिटेल
कृषि योजना को ऑपरेट करने के लिए सरकार ने 36 केंद्रीय योजनाओं को मिलाने का फैसला लिया है.

केंद्र सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और उनके कृषि उपज को वाजिब कीमत दिलाने के लिए समय-समय पर कई कदम उठाती है.सरकार ने इसी कड़ी में बुधवार को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी है. इस योजना का मकसद किसानों को फसल कटाई के बाद स्टोरेज की बेहतर सुविधा देना, सिंचाई व्यवस्था को सुधारना और खेती की पैदावार को बढ़ाना है. ये योजना अगले 6 साल तक 100 जिलों को कवर करेगी. इस योजना के लिए सरकार ने हर साल24,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है. करीब 1.7 करोड़ किसानों को इस योजना का फायदा मिलने की उम्मीद है.

आइए जानते हैं प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को कैसे किया जाएगा ऑपरेट? इससे किसानों को कैसे मिलेगा फायदा? कौन से 100 जिलों में ये योजना चलेगी:-

किसानों को क्या होगा फायदा?
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के जरिए सरकार छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर बढ़ाने की कोशिश करेगी. इससे कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी. किसानों को अलग-अलग फसलें उगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा. कुल मिलाकर इससे किसानों की इनकम में इजाफा होगा. उन्हें उनकी फसलों का उचित दाम मिलेगा.

कृषि योजना को कैसे किया जाएगा ऑपरेट?
कृषि योजना को ऑपरेट करने के लिए सरकार ने 36 केंद्रीय योजनाओं को मिलाने का फैसला लिया है. कुल 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को क्लब किया जाएगा. इसमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी. इस योजना की मॉनिटरिंग के लिए हर जिले, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक्सपर्ट कमिटी बनाई जाएगी.

डिजिटल डैशबोर्ड से होगी निगरानी
इस योजना के जरिए हर जिले का अपना ‘डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर एंड अलाइड एक्टिविटीज प्लान तैयार होगा. 117 पॉइंट पर हर महीने हर जिले की प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार की जाएगी. नीति आयोग और केंद्रीय अधिकारी भी समय-समय पर इसकी निगरानी करेंगे.

कैसे चुने जाएंगे जिले?
कम उत्पादकता, कम फसल और कम ऋण वितरण के तीन प्रमुख संकेतकों के आधार पर 100 जिलों की पहचान की जाएगी. प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में जिलों की संख्या शुद्ध फसल क्षेत्र और कार्यशील जोतों के हिस्से पर आधारित होगी.

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पंचायत-ब्लॉक लेवल पर स्टोरेज
इस योजना के जरिये पंचायत और ब्लॉक लेवल पर ही फसलों की स्टोरेज कैपासिटी तैयार होगी, ताकि स्थानीय स्तर पर ही इन्हें सुरक्षित रखकर खर्च बचाया जा सके. इसमें छोटे किसानों को सस्ता कर्ज मुहैया कराया जाएगा.

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