नई दिल्लीः भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को उम्मीद है कि नीरव मोदी मामले में फंसा उसका पैसा निकल जाएगा. एसबीआई के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक रजनीश कुमार ने आज कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) इस मामले में हमारा 21.2 करोड़ डॉलर या 1,360 करोड़ रुपए का भुगतान कर देगा. सीएनबीसी टीवी 18 से इंटरव्यू में कुमार ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि पीएनबी और अन्य बैंकों के बीच चीजों को सुलझा लिया जाएगा. कुमार ने कहा कि जहां तक इस मामले में हमारे धन का सवाल है, उसकी पूरी तरह गणना कर पीएनबी को बता दिया गया है. उन्होंने कहा कि जहां तक एसबीआई द्वारा गीतांजलि जेम्स को दिए गए कर्ज का सवाल है, उसमें बातें स्पष्ट हो चुकी हैं और इसमें कोई मुद्दा नहीं है. इस घोटाले में गीतांजलि जेम्स भी शामिल है. Also Read - ATM Cash Withdrawal Rules: एक जुलाई से बदल जाएंगे नियम, आपके पास SBI का कार्ड है तो जान लें ये बदलाव

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उन्होंने कहा कि हमारे आंकड़े और हमारा दावा पूरी तरह स्पष्ट है. यह पूछे जाने पर कि क्या बैंकिंग क्षेत्र में इस तरह के और मामले देखने को मिल सकते हैं, कुमार ने कहा कि यह पीएनबी की एक विशेष शाखा से जुड़ा मामला लगता है. उन्होंने कहा कि जहां तक एसबीआई का सवाल है, मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कोई मुद्दा नहीं है, कोई समस्या नहीं है. Also Read - कर्ज की स्थगित किस्तों पर ब्याज पर ब्याज वसूलने का कोई तुक नहीं बनता: सुप्रीम कोर्ट

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मेरा मानना है कि अन्य बैंकों ने भी अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा कर ली होगी और वे भी इसी निष्कर्ष पर पहुंचे होंगे. यदि कुछ गलत होता, तो मेरा मानना है कि अब तक वह सामने आ जाता. यह पूछे जाने पर कि क्या रिजर्व बैंक ने मूल बैंकिंग समाधान को स्विफ्ट से जोड़ने के अलावा कोई अन्य निर्देश भी दिया है, कुमार ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर और जानकारी नहीं है.

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गौरतलब है कि पंजाब नेशनल बैंक में 11 हजार करोड़ से ज्यादा का घोटाला सामने आने के बाद सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन (स्विफ्ट) में बैंक ने बदलाव कर दिया है. स्विफ्ट नेटवर्क के माध्यम से ही नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने बैंक के कर्मचारियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी की थी. स्विफ्ट नेटवर्क को क्लर्क की जगह अब अधिकारी ही कंट्रोल करेंगे. स्विफ्ट मैसेज बनाने, जांचने और अधिकृत करने का काम बैंक के तीन अलग-अलग अफसर करेंगे. पहले ये काम सिर्फ दो अफसर ही करते थे.