
Manoj Yadav
'बिजनेस' की खबरों में खास रुचि रखने वाले मनोज यादव को 'पॉलिटिकल' खबरों से भी गहरा लगाव है. ये इंडिया.कॉम हिंदी के बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं. इनके पास ... और पढ़ें
PNB Scam: मुंबई की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड की 13 संपत्तियों की नीलामी की अनुमति दे दी है. यह फैसला धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत सुनवाई कर रही विशेष अदालत के न्यायाधीश एस.एम. मेंजोगे ने सुनाया.
अदालत ने आधिकारिक परिसमापक (Official Liquidator) की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि अगर संपत्तियों को बिना रखरखाव के निष्क्रिय छोड़ दिया जाता है, तो उनका मूल्य कम हो जाएगा. इसलिए इनका जल्द से जल्द नीलामी किया जाना जरूरी है.
अदालत के आदेश के अनुसार, गीतांजलि जेम्स लिमिटेड की कुल 13 संपत्तियों की नीलामी की जाएगी. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
मुंबई: सांताक्रूज स्थित खेनी टॉवर में 7 फ्लैट
भारत डायमंड बोर्स: 1 वाणिज्यिक इकाई
गुजरात, सूरत: डायमंड पार्क में 4 ऑफिस यूनिट और 1 दुकान
ये संपत्तियां PNB घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कुर्क की गई थीं और अब इन्हें कानूनी रूप से नीलाम करने की अनुमति मिल गई है.
PNB घोटाला भारत के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक है, जो 2018 में उजागर हुआ था. इस घोटाले में मेहुल चोकसी और उसका भांजा नीरव मोदी मुख्य आरोपी हैं. आरोप है कि इन्होंने PNB की मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस ब्रांच से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिए करीब 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की.
नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी गारंटी पत्र जारी करवाए, जिसके आधार पर इन्होंने विदेशों में बैंकों से लोन लिया और उसे चुकाए बिना फरार हो गए. इस मामले के उजागर होने के बाद भारत की प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच शुरू की और मेहुल चोकसी तथा नीरव मोदी पर कई आरोप दर्ज किए.
घोटाले के खुलासे के बाद मेहुल चोकसी 2018 में एंटीगुआ और बारबुडा भाग गया और वहां की नागरिकता हासिल कर ली. भारत सरकार ने उसे वापस लाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन वह अभी भी भारत की गिरफ्त से बाहर है.
वहीं, नीरव मोदी ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया है और फिलहाल लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है. भारत सरकार उसकी प्रत्यर्पण (Extradition) की कोशिश में जुटी हुई है.
नीलामी से केंद्र सरकार को उम्मीद है कि कुछ धनराशि वसूल की जा सकेगी, जिससे PNB को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके. हालांकि, अब तक की संपत्तियों की बिक्री से मिली रकम घोटाले के कुल नुकसान के मुकाबले बहुत कम है.
मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के फरार होने के बाद भी सरकार इनकी अन्य संपत्तियों को जब्त कर रही है और कानूनी कार्रवाई जारी है. लेकिन, सवाल यह है कि क्या यह घोटालेबाजों को सच में कड़ी सजा दिला पाएगा? या फिर यह मामला भी अन्य आर्थिक घोटालों की तरह सिर्फ नीलामी और कानूनी लड़ाइयों तक सीमित रह जाएगा?
गौरतलब है कि नीलामी की यह प्रक्रिया भारत में आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश जरूर भेजेगी, लेकिन जब तक मुख्य आरोपी भारत की गिरफ्त में नहीं आते, यह केस अधूरा ही रहेगा.
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