मुंबई: सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में कहा है कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की पूर्व एमडी और सीईओ ऊषा अनंतसुब्रमण्यन और बैंक के कुछ अन्य अधिकारी फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी के ‘ धोखाधड़ी’ वाले लेन-देन के बारे में जानते थे लेकिन आरबीआई को गुमराह किया गया. सीबीआई की एक विशेष अदालत ने यहां आरोप पत्र पर संज्ञान लिया और जांच एजेंसी को नीरव मोदी , उसके भाई निशाल और नीरव मोदी समूह के एक कर्मचारी सुभाष पारब के खिलाफ नS गैर – जमानती वारंट जारी करने की अनुमति दी. Also Read - Bank Holidays in December 2020: दिसंबर में इतने दिन बंद रहेंगे बैंक, जरूरी काम निपटाने जा रहे हैं तो देख लें ये लिस्ट

13 हजार करोड़ से ज्यादे का घोटाला
लगभग 13 हजार करोड़ रुपये के घोटाला मामले में अपने आरोप पत्र में सीबीआई ने कहा कि आरबीआई ने अक्टूबर 2016 से पीएनबी के पास कई प्रश्नावली भेजी थी ताकि यह पता लग सके कि बैंक ने लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग्स और लेटर्स ऑफ क्रेडिट्स जारी करने से पहले किन प्रक्रियाओं का पालन किया था. Also Read - Coal Smuggling: छापेमारी करने गई CBI तो हुआ हादसा, ECL अधिकारी की हो गई मौत

12 हजार पेज का आरोप पत्र
सीबीआई ने कहा ,‘ इसे आरोपियों अनंतसुब्रमण्यन और बैंक के कार्यकारी निदेशकों के वी ब्रह्माजी राव , संजीव शरण और नेहल अहाद द्वारा निपटाया गया और सही ढंग और तथ्यों पर जवाब देने के बजाय अहाद और बैंक के मुख्यालय के अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग डिवीजन के महाप्रबंधक ने भ्रामक जवाब तैयार किया और शरण से मंजूरी लेने के बाद इसे आरबीआई को भेज दिया. 12 हजार पृष्ठ के आरोप पत्र में दावा किया गया कि इसी तरह की एक धोखाधड़ी 2016 में सामने आई और इसके बाद आरबीआई ने सभी बैंकों को परिपत्र जारी किए थे. Also Read - Roshni Land Scam Latest News: CBI ने J&K के पूर्व मंत्री कांग्रेस नेता के खिलाफ केस दर्ज

पता था पर नहीं की कार्रवाई
आरोप पत्र में कहा गया है कि अनंतसुब्रमण्यन और अन्य समेत आरोपी पीएनबी अधिकारी पीएनबी दुबई और इंडियन ओवरसीज बैंक चंडीगढ में शामिल इस धोखाधड़ी के बारे में जानते थे लेकिन उन्होंने कोई सुधारत्मक कार्रवाई नहीं की और मूकदर्शक बने रहे. सीबीआई ने पिछले सप्ताह दायर किए गए अपने आरोप पत्रों में आरोप लगाया है कि नीरव मोदी ने अपनी कंपनियों के माध्यम से धोखाधड़ी की. मुम्बई में पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा से जारी फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग्स (एलओयू) का उपयोग करके 6,498.20 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई. चोकसी ने 7080.86 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की.