
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
मोदी सरकार देश में रोजगार के मौके को बढ़ाने के लिए कई तरह की स्कीम चलाती है. मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट को आगे ले जाने और खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में युवाओं को नौकरियां देने के मकसद से सरकार ने 1 अगस्त 2025 से प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना शुरुआत की थी. 15 अगस्त (शुक्रवार) को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से इस योजना को लागू करने का ऐलान किया. इसके तहत पहली नौकरी शुरू करने पर सरकार की तरफ से 15 हजार रुपये दिए जाएंगे.
पहले इसे एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव (Employment Linked Incentive) यानी ELI नाम से लॉन्च किया जाना था. बाद में इस योजना का नाम विकसित भारत रोजगार योजना कर दिया गया. इस स्कीम को लेकर कई तरह के कंफ्यूजन हैं. आइए जानते हैं ELI स्कीम क्या है. इसका फायदा लेने की शर्तें क्या हैं? जिनका PF अकाउंट है, क्या उन्हें इस स्कीम का फायदा होगा? अगर पहली नौकरी 3 महीने बाद छोड़ देते हैं, तो क्या इंसेंटिव बनेगा:-
क्या है ये स्कीम?
इस स्कीम से पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को केंद्र सरकार अपनी ओर से 15000 रुपये देगी. फ्रेशर्स को नौकरी देने वाली कंपनियों को भी सरकार 3000 रुपये तक प्रति कर्मचारी देगी. इस स्कीम को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ऑपरेट करेगा. इस योजना के लिए 99,446 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है.
इस योजना का मकसद क्या है?
विकसित भारत रोजगार योजना का मकसद भारत में ज्यादा से ज्यादा नौकरियां पैदा करना है. अगले दो साल में 3.5 करोड़ नई नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस किया गया है. इस योजना के जरिए युवाओं खासकर 18-35 साल के युवाओं को स्किल्ड बनाकर उन्हें नौकरी के लिए तैयार करना है. ये स्कीम ‘मेक इन इंडिया‘ को बढ़ावा देगी. साथ ही लोगों की स्किल्स को बेहतर करेगी. इससे उन्हें सोशल सिक्योरिटी जैसे पेंशन, इंश्योरेंस की सर्विस भी मिलेगी.इस योजना का मकसद अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले छोटे और मझोले बिजनेस यानी MSMEs को सपोर्ट करना है.
पीएम विकसित भारत रोजगार योजना की शर्तें?
पहली बार EPFO से जुड़ने वाले युवा इस योजना के लिए पात्र हैं. कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी 1 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए. कम से कम 6 महीने तक कर्मचारी को एक ही कंपनी में नौकरी करना होगा. कंपनी का EPFO में रजिस्टर्ड होना जरूरी है. यह योजना सिर्फ प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले युवाओं के लिए होगी.
पैसा कब और कैसे मिलेगा?
पहली किस्त कंपनी में 6 महीने पूरे होने के बाद कर्मचारी के खाते में आएगी दूसरी किस्त 12 महीने पूरे करने और फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम पूरा करने के बाद आएगी. कुछ पैसा PF अकाउंट जाएगा, ताकि युवाओं में बचत की भावना बढ़े. कुछ पैसा सीधे कर्मचारियों के अकाउंट में आएगा.कंपनी की हिस्सेदारी का पैसा DBT के जरिए सीधे अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा.
जिनका पहले से PF अकाउंट है, क्या उन्हें भी इस स्कीम का फायदा मिलेगा?
कई लोगों का सवाल है कि जिनका पहले से PF अकाउंट है, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा या नहीं? इस सवाल का जवाब है- नहीं. ये योजना सिर्फ और सिर्फ फ्रेशर्स के लिए है. अगर आपका पहले से PF अकाउंट है, तो इसका मतलब हुआ कि आप पहले नौकरी कर चुके हैं, ऐसे में आप प्रेशर्स नहीं कहलाएंगे. इसलिए जिनका पहले PF खाता है, वो इस योजना के तहत 15000 पाने के पात्र नहीं होंगे.
क्या नौकरी बदलने पर भी सरकार देगी 15000 रुपये?
ELI स्कीम के नियमों में स्पष्ट है कि पहली नौकरी करते हुए कम से कम 6 महीने पूरे करने ही होंगे, उसके बाद ही 15000 रुपये में से पहली किस्त मिलेगी. अब अगर आप दूसरी किस्त मिलने से पहले ही पहली नौकरी छोड़ देते हैं और दूसरा जॉब ऑफर एक्सेप्ट कर लेते हैं, तो इसकी पूरी संभावना है कि दूसरी किस्त का लाभ आप गंवा दें. नियम के मुताबिक, 12वें महीने में आने वाला पैसा आपकी पहली नौकरी के लिए होगा. ऐसे में अगर आप पहली नौकरी 2 या 3 महीने में ही छोड़ देते हैं और दूसरी जॉब शुरू कर देते हैं, तो आप इस स्कीम के लिए अयोग्य यानी डिस्क्वॉलिफाइड हो जाएंगे.
कब तक चलेगी ये स्कीम?
एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम 1 अगस्त 2025 से शुरू होगी. इसे 31 जुलाई 2027 तक चलाया जाएगा. ऐसे में 2 साल के अंदर 3.5 करोड़ से ज्यादा नौकरियां पैदा करने का टारगेट रखा गया है.
ये योजना कैसे काम करेगी?
प्रधाननंत्री विकसित भारत रोजगार योजना 2 हिस्सों में बांटी गई है: पार्ट A और पार्ट B. पार्ट A उन लोगों के लिए है, जो पहली बार नौकरी शुरू कर रहे हैं और EPFO में रजिस्टर्ड हैं. इस हिस्से से करीब 1.92 करोड़ नए कर्मचारियों को फायदा होगा. ऐसे कर्मचारियों को पहले महीने की सैलरी (मैक्सिमम15,000) दो हिस्सों में दी जाएगी. ये फायदा उन कर्मचारियों को मिलेगा, जिनकी सैलरी सालाना 1 लाख रुपये तक है. बचत की आदत को बढ़ाने के लिए, इस इंसेंटिव का कुछ हिस्सा एक सेविंग्स अकाउंट या डिपॉजिट में रखा जाएगा, जिसे कर्मचारी बाद में निकाल सकते हैं.
पार्ट B में कंपनियों के लिए है प्रॉविजन
योजना का ये हिस्सा हर सेक्टर में ज्यादा नौकरियां पैदा करने पर फोकस करता है. जिन कर्मचारियों की सैलरी 1 लाख रुपये तक है, उनके लिए कंपनियों को इंसेंटिव मिलेगा. सरकार कंपनियों को प्रति कर्मचारी 3,000 रुपये प्रति महीना दो साल तक देगी. बशर्ते कर्मचारी कम से कम 6 महीने तक नौकरी में रहे. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए ये इंसेंटिव तीसरे और चौथे साल तक भी मिलेगा. EPFO में रजिस्टर्ड कंपनियों को कम से कम 2 नए कर्मचारी (50 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों के लिए) या 5 नए कर्मचारी (50 या ज्यादा कर्मचारियों वाली) 6 महीने तक काम पर रखने होंगे.
सैलरी के हिसाब से मिलेगा कितना पैसा?
अगर आपकी मंथली सैलरी 10,000 रुपये है, तो आपको 1000 रुपये तक मिलेंगे. 10000-20000 के रेंज वाली सैलरी पर 2000 रुपये, 20000-100000 रुपये की सैलरी पर 3000 रुपये का इंसेंटिव रखा गया है.
कैसे करेंगे अप्लाई?
PM विकसित भारत रोजगार योजना के तहत अलग से अप्लाई करने की जरूरत नहीं है. जैसे ही कर्मचारी का पहली बार PF अकाउंट खुलेगा, वह इस योजना के लिए पात्र हो जाएंगे. बस कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी 1 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए. सरकार की ओर से UAN नंबर के आधार पर ही पैसा ट्रांसफर किया जाएगा.
कौन से डॉक्यूमेंट की पड़ेगी जरूरत?
PM विकसित भारत रोजगार का फायदा लेने के लिए EPFO का UAN नंबर, कंपनी का अपॉइंटमेंट लेटर, एजुकेशनल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर, रेजिडेंट प्रूफ और पासपोर्ट साइज फोटो चाहिए.
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