नई दिल्ली. पिछले 5 वर्षों में देश के 10 निजी बैंकों के 1 लाख करोड़ का कर्ज डूब गया है. जी हां, ICICI बैंक जैसे देश के सबसे बड़े निजी बैंक समेत कई बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स यानी एनपीए 5 गुना से ज्यादा बढ़ गया है. वर्ष 2013-14 में जहां इन बैंकों का कुल एनपीए 19800 करोड़ था, वहीं मार्च 2018 में यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ से ज्यादा यानी 109,076 करोड़ हो गया है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक देश के निजी बैंकों के एनपीए में यह इजाफा करीब 450 प्रतिशत का है. बैंकों के एनपीए में सबसे बड़ा ICICI बैंक का है, जिसकी एमडी व सीईओ चंदा कोचर पर हाल ही में वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत को कर्ज देकर उसे एनपीए में बदलने का आरोप लगा है. बढ़े एनपीए के कारण इन बैंकों का घाटा भी बढ़ गया है. ICICI बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार चौथी तिमाही में इस बैंक के मुनाफे में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है. वहीं फेडरल बैंक के मुनाफे में इसी अवधि में 44 प्रतिशत का नुकसान दर्ज किया गया है.

5 साल में 10 हजार करोड़ से 54 हजार करोड़
जिन निजी बैंकों के कर्ज पांच साल में सबसे ज्यादा डूबे हैं, उनमें सबसे पहला नंबर ICICI बैंक का है. वर्ष 2013-14 में इस बैंक का एनपीए जहां 10506 करोड़ था, वहीं अगले 4 वर्षों में यह बढ़कर 54063 करोड़ पर पहुंच गया है. इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर एक्सिस बैंक है, जिसका एनपीए 2013-14 में 3146 करोड़ था. लेकिन मार्च 2018 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में एक्सिस बैंक का यह आंकड़ा बढ़कर 34249 करोड़ पर पहुंच गया है. एनपीए की फेहरिस्त में तीसरे स्थान पर रहे एचडीएफसी बैंक का कर्ज वित्तीय वर्ष 2013-14 में जहां 2989 करोड़ था, वहीं मार्च 2018 में यह आंकड़ा बढ़कर 8607 करोड़ पर पहुंच गया है.

बैंकिंग सुधार की दृष्टि से एनपीए बढ़ना बड़ा नुकसान
देश के निजी बैंकों के एनपीए में यह बढ़ोतरी बड़ा नुकसान है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक कोटक महिंद्रा बैंक का एनपीए वर्ष 2013-14 में 1059 करोड़ था, जो अगले 4 वर्षों में बढ़कर 3825 करोड़ हो गया है. वहीं, फेडरल बैंक का एनपीए 2013-14 के 1087 करोड़ से बढ़कर 2017-18 में 2796 करोड़ हो गया है. निजी क्षेत्र के बैंक येस बैंक का एनपीए 5 साल पहले जहां 175 करोड़ था, मार्च 2018 में यह 2627 करोड़ हो गया है. इंडसइंड बैंक का एनपीए 621 करोड़ से बढ़कर 1705 करोड़ पर पहुंच गया है. इसी तरह डीसीबी बैंक का एनपीए 2013-14 में जहां 138 करोड़ का था, वह मार्च 2018 में 369 करोड़ का हो गया है. इसके अलावा आरबीएल बैंक का एनपीए 5 वर्षों में 78 करोड़ से बढ़कर 567 करोड़ पर पहुंच गया है. एनपीए की इस लिस्ट में आखिरी पायदान पर रहे एयू स्मॉल फाइनेंस के एनपीए का आंकड़ा सिर्फ दो वर्षों का है. इस कंपनी का एनपीए वर्ष 2016-17 में जहां 125 करोड़ था, वह एक साल में बढ़कर 270 करोड़ हो गया है.