
Anjali Karmakar
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से मास कॉम में मास्टर्स डिग्री. 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव. पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल न्यूज, बिजनेस और स्पोर्ट्स में खास दिलचस्पी. दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, ... और पढ़ें
प्रॉपर्टी खरीदने, घर लेने या फ्लैट बुक करने के बाद पहला काम रजिस्ट्री का होता है. प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए अब तक 117 साल पुराने कानून को फॉलो किया जाता है, लेकिन जल्द ही केंद्र सरकार इस कानून को बदलने जा रही है. सरकार ने 117 साल पुराने रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ‘रजिस्ट्रेशन बिल 2025′(The Registration Bill 2025) का ड्राफ्ट तैयार किया है. नए बिल के तहत अब किसी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए खरीदार और बेचने वाले को एक ही जगह पर मौजूद रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आप प्रॉपर्टी या जमीन की रजिस्ट्री इलेक्ट्रॉनिक बयान और आधार कार्ड या दूसरे आईडी कार्ड के जरिए ऑनलाइन करा सकेंगे.
इस ड्राफ्ट बिल पर सरकार ने लोगों से सुझाव मांगे थे, जो मिल चुके हैं. उम्मीद की जा रही है कि इस बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. अगर ‘रजिस्ट्रेशन बिल 2025’ संसद के दोनों सदनों राज्यसभा और लोकसभा से पास हो गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस पर साइन कर दिए, तो ये कानून बन जाएगा.
सरकार को क्यों पड़ी 117 साल पुराने कानून बदलने की जरूरत?
यह नया बिल 117 साल पुराने यानी 1908 में बने रजिस्ट्रेशन एक्ट की जगह लेगा. अभी तक डॉक्यूमेंट के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के लिए इसी कानून को फॉलो किया जाता है. 1908 का कानून आज के डिजिटल और मॉर्डन टेक्नोलॉजी के हिसाब से काफी पुराना हो चुका है. डॉक्यूमेंट का रजिस्ट्रेशन सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं, बल्कि फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव फैसलों का आधार बन चुका है. कई राज्यों ने पहले ही लैंड या प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट ऑनलाइन अपलोड करने और डिजिटल वैरिफिकेशन की सुविधा देनी शुरू कर दी है. इसलिए केंद्र सरकार ने रजिस्ट्री कानून को बदलने का फैसला लिया है. ताकि नागरिकों के सामने एक समान, आधुनिक और भरोसेमंद रजिस्ट्रेशन सिस्टम हो.
नया रजिस्ट्रेशन बिल कानून बन गया तो लोगों को क्या फायदा?
सब-रजिस्ट्रार को मजिस्ट्रेट जैसे अधिकार
प्रस्तावित ‘रजिस्ट्रेशन बिल 2025′ में सब-रजिस्ट्रार को मजिस्ट्रेट जैसे अधिकार दिए जाने का प्रावधान है. वे झूठे दस्तावेजों पर की गई रजिस्ट्री को बिना अदालत के रद्द कर सकेंगे. साथ ही दोषियों पर सीधा एक्शन भी ले सकेंगे.
इन चीजों की रजिस्ट्री जरूरी
नए बिल में सेल डीड के अलावा एग्रीमेंट टू सेल, पावर ऑफ अटॉर्नी, ज्यूडिशियल ऑर्डर और जजों के फैसलों की रजिस्ट्री भी अनिवार्य होगी. सभी दस्तावेज़ों का रिकॉर्ड म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और आर्काइव से डायरेक्ट रहेगा.
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