नई दिल्ली: बेमौसम बरसात सरसों और आलू की फसलों के लिए आफत बनकर आई है, क्योंकि सरसों में जहां इस बारिश से गलन और सफेद रतुआ की बीमारी का प्रकोप बढ़ने की संभावना है, वहीं आलू की फसल को नुकसान हो सकता है. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत पूरे उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली इस बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने पिछले रविवार को ही दी थी. पिछले दो तीन दिनों से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जगह-जगह काफी बारिश हुई है और जहां खेतों में पानी भर गया है, वहां किसानों को आलू की फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है. वहीं, नमी बढ़ने से सरसों की फसल में बीमारी का प्रकोप बढ़ने का खतरा बना हुआ है. Also Read - सरकार ने दी राहत, किसानों को 2000 रुपए की पहली किस्त अप्रैल के पहले हफ्ते में ही मिलेगी

हालांकि कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि गेहूं और चना की फसल को बारिश से फिलहाल कोई नुकसान नहीं है, लेकिन खेतों में पानी भरने की स्थिति में इन फसलों को भी नुकसान हो सकता है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत आने वाले राजस्थान के भरतपुर स्थित सरसों अनुसंधान निदेशालय के कार्यकारी निदेशक पी.के. राय ने आईएएनएस को बताया कि इस समय हो रही बारिश से सरसों की फसल में तना गलन रोग का प्रकोप बढ़ेगा जबकि सरसों पर जगह-जगह सफेद रतुआ (व्हाइट रस्ट) का प्रकोप पहले से ही बना हुआ है. Also Read - देश के 80 करोड़ गरीबों के लिए मोदी सरकार के Rs. 1.70 लाख करोड़ के राहत पैकेज की खास बातें

देश में मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में सरसों की खेती ज्यादा होती है और इन सभी राज्यों में बारिश बीते कुछ दिनों से हो रही है और भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के पूवार्नुमान के अनुसार, उत्तर भारत में 17 जनवरी तक जगह-जगह बारिश हो सकती है. आईसीएआर के तहत आने वाले केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान-क्षेत्रीय केंद्र मोदीपुरम, मेरठ के संयुक्त उपनिदेशक डॉ. मनोज कुमार ने आईएएनएस को बताया कि आलू की फसल तैयार हो गई है वह खेतों में पानी लगने के कारण सड़ सकती है, जबकि विलंब से लगाई गई फसल का विकास रुक सकता है. उन्होंने कहा कि खेतों में जहां पानी भरेगा वहां आलू की फसल खराब होने की संभावना बढ़ जाएगी. Also Read - Weather Update: दिल्ली NCR में बदला मौसम का मिजाज, बारिश के साथ पड़े ओले

कारोबारी बताते हैं कि बारिश से फसल खराब होने पर इस साल आलू का उत्पादन घट सकता है, क्योंकि मानसून के आखिरी दौर की बारिश के कारण फसल लगाने में पहले ही विलंब हो चुका है और इस बारिश से फसल खराब होने की संभावना बढ़ गई है. आईसीएआर के तहत आने वाले भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक एवं परियोजना संयोजक जी. पी. दीक्षित ने बताया कि चना की फसल को बहरहाल कोई नुकसान नहीं है, बल्कि इस बारिश से किसानों को सिंचाई का खर्च की बचत हुई है और इससे चने की फसल को फायदा ही मिल सकता है.

आईसीएआर के तहत आने वाले हरियाणा के करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल को सर्दी के मौसम की इस बारिश से फिलहाल कोई नुकसान नहीं है. उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल को बारिश से तभी नुकसान हो सकता है जब खेतों में दो दिनों से अधिक समय तक पानी खड़ा रह जाएगा. वैज्ञानिकों ने बताया कि दो दिनों तक खेतों में पानी खड़ा रहने से रबी सीजन की कई फसलों को नुकसान हो सकता है.