नई दिल्‍ली: श्रम मंत्रालय कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए ब्‍याज दर घटा दी गई है. यह बात केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार Union Labour Minister Santosh Gangwar ने कही. केंद्रीय श्रम मंत्री ने कहा कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टी Central Board of Trustees ने कर्मचारी भविष्‍य निधि employees provident fund 2019-2020 के लिए 8.5% रखने का फैसला किया है. पहले यह ब्‍याज 8.65 फीसदी थी. Also Read - EPF से निकासी के नियम बदलेगी सरकार, 75% तक रकम आसानी से ऐसे निकाल पाएंगे

ईपीएफओ के शीर्ष निर्णय लेने वाला निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की गुरुवार यानि पांच मार्च को हुई 2020 को होने वाली बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जमा पर ब्याज दर तय की है. Also Read - Provident Fund Withdrawal: PF से पैसा निकालना और आसान, Unified Portal पर कर्मचारी खुद डालेंगे नौकरी छोड़ने की तारीख

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कर्मचारी भविष्य निधि पर 2019-20 के लिए ब्याज दर 2018-19 के 8.65 प्रतिशत से घटाकर 8.50 प्रतिशत की. Also Read - PF चेक करने के लिए कर्मचारी खुद से ही पा सकेंगे UAN, ईपीएफओ ने पेश की ये सुविधा

ईपीएफ जमा पर 2019-20 के लिए घोषित ब्याज दर 2012-13 के बाद सबसे कम है. उस समय इसपर 8.5 प्रतिशत ब्याज दिया गया था. ईपीएफओ ने अपने अंशधारकों को 2016-17 में 8.65 प्रतिशत, 2017-18 में 8.55 प्रतिशत का ब्याज दिया था. वित्त वर्ष 2015-16 में ब्याज दर 8.8 प्रतिशत थी. वित्त वर्ष 2013-14 और 2014-15 में ब्याज दर 8.75 प्रतिशत तथा 2012-13 में 8.5 प्रतिशत थी.

हालांकि, पहले कहा जा रहा था कि श्रम मंत्रालय वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर को 8.65 प्रतिशत पर ही बरकरार रखने का इच्छुक है, लेकिन ईपीएफ पर ब्याज दर को चालू वित्त वर्ष में घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया गया है. इसकी संभावना भी पहले जताई गई थी. 2018-19 में ईपीएफ पर 8.65 प्रतिशत ब्याज दिया गया.

ईपीएफओ EPFO ने अपने अंशधारकों को 2016-17 में 8.65 फीसदी और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत ब्याज दिया था. वित्त वर्ष 2015-16 में इस पर 8.8 प्रतिशत का सबसे ऊंचा ब्याज दिया गया था. इससे पहले 2013-14 और 2014-15 में ईपीएफ पर 8.75 प्रतिशत का ब्याज दिया गया था. 2012-13 में ईपीएफ पर ब्याज दर 8.5 प्रतिशत रही थी.

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने बैठक के बाद कहा, ”ईपीएफओ ने सीबीटी की आज हुई बैठक में 2019-20 के लिये भविष्य निधि जमा पर 8.5 प्रतिशत ब्याज देने का निर्णय किया है.” मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर 8.5 प्रतिशत ब्याज देने से ईपीएफओ के पास 700 करोड़ रुपए का अधिशेष होगा.

मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि ईपीएफओ अगर 8.55 प्रतिशत ब्याज देता तो उसके पास 300 करोड़ रुपए का अधिशेष रहता. इससे ज्यादा ब्याज देने पर ईपीएफओ को नुकसान होता.

श्रम मंत्रालय को इस मामले में वित्त मंत्रालय से सहमति लेना जरूरी होता है. चूंकि ईपीएफओ रिटर्न मामले में भारत सरकार की गारंटी होती है, अत: वित्त मंत्रालय ब्याज दर की समीक्षा करता है ताकि ईपीएफओ की आय में किसी प्रकार की कमी से देनदारी नहीं बने.

वित्त मंत्रालय ईपीएफ ब्याज दर को लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) और डाकघर बचत जमा योजनाएं जैसी अन्य लघु बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज के अनुरूप करने के लिये श्रम मंत्रालय से कहता रहा है.