नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ने आज अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान कर दिया. आरबीआई ने नीतिगत दर (रेपो दर) 0.25 प्रतिशत बढ़कर 6.25 प्रतिशत किया है. जबकि रिवर्स रेपो रेट भी 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6.50 फीसदी तय की है. आरबीआई ने 2018-19 की पहली छमाही में मुद्रास्फीति दर 4.8-4.9 फीसदी के बीच, जबकि दूसरी छमाही में 4.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. ब्याज बढ़ाने का अर्थ है कि इससे बैंक से लोन लेना महंगा हो सकता है और आपको ईएमआई भी ज्यादा चुकानी होगी. मोदी सरकार के 4 साल के कार्यकाल में पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है. आरबीआई ने इस साल के लिए संभावित जीडीपी ग्रोथ का भी आंकड़ा दिया है. आरबीआई ने कहा कि 2018-19 की पहली छमाही के लिए जीडीपी 7.5-7.6 जबकि दूसरी छमाही में 7.3-7.4 रहने का अनुमान है.

रिजर्व बैंक ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति के बारे में अपने पहले के अनुमान को आज मामूली रूप से बढ़ा दिया. मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन चली बैठक के बाद जारी वक्तव्य में रिजर्व बैंक ने कहा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में तेजी से बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई. इस दौरान खाद्य , ईंधन को छोड़कर अन्य समूहों में तीव्र वृद्धि का इसमें अधिक योगदान रहा. मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अप्रैल में हुई बैठक के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की भारतीय बास्केट का दाम 66 ड\लर बढ़कर 74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. इसमें करीब 12 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई. विश्व बाजार में दूसरी उपभोक्ता जिंसों के दाम बढ़ने के साथ ही हाल के वैश्विक वित्तीय बाजार के घटनाक्रमों से विभिन्न उत्पादों के मामले में लागत दबाव बढ़ गया.

मुद्रास्फीति का ये जताया अनुमान

विभिन्न घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुये रिजर्व बैंक ने 2018- 19 की पहली छमाही के लिये खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को संशोधित कर 4.8- 4.9 प्रतिशत और इसके बाद की अवधि के लिये 4.7 प्रतिशत कर दिया. इसमें केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले बढ़े हुये आवास किराया भत्ते का असर भी शामिल है. साथ ही इसमें वृद्धि का जोखिम भी बताया गया है. पिछली मौद्रिक समीक्षा में रिजर्वबैंक ने सरकारी कर्मचारियों के आवास किराया भत्ते के प्रभाव सहित पहली छमाही के लिये मुद्रास्फीति के 4.7- 5.1 प्रतिशत अैर दूसरी छमाही के लिये 4.4 प्रतिशत का अनुमान लगाया था.

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की समीक्षा बैठक आज लगातार तीसरे दिन तक चली. इसके बाद रेपो और रिवर्स रेपो रेट का ऐलान किया गया. आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक तीन दिन चली. आमतौर पर यह बैठक दो दिन होती है लेकिन प्रशासनिक अनिवार्यताओं के चलते पहली बार एमपीसी की बैठक तीन दिन चली.

यह चालू वित्त वर्ष (2018-19) की दूसरी मौद्रिक समीक्षा बैठक थी. रिजर्व बैंक ने इससे पहले जनवरी 2014 में नीतिगत दर को बढ़ाकर आठ प्रतिशत किया था. तब से इसमें या तो कमी की गई या फिर इसे स्थिर रखा गया. वर्तमान में प्रमुख नीतिगत दर रेपो छह प्रतिशत पर है.