Reserve Bank of India: रियल सेक्टर में सुधार लाने के लिए रिजर्व बैंक ने एक नियम लागू किया है, जिसके कारण आने वाले दिनों में होम लोन सस्ता हो जाएगा. हालांकि यह 75 लाख से ज्यादा के होम लोन पर लागू होगा. रिजर्व बैंक ने भले ही रेपो रेट में कटौती नहीं की है, लेकिन होम लोन सस्ता हो सकता है. दरअसल, रिजर्व बैंक ने 31 मार्च 2022 तक सभी नए लोन के रिस्क वेट (Risk weight) को LTV यानी Loan to value से लिंक कर दिया है. Also Read - Diwali Bonus: लॉकडाउन के दौरान समय पर EMI चुकाने वालों को कैशबैक देगी सरकार, जानें क्या है पूरा मामला

आपको समझने में थोड़ा टेक्निकल जरूर लग सकता है, लेकिन ये बेहद आसान है… Also Read - Loan Moratorium Update: लोन मोरेटोरियम के दौरान कर्ज पर ब्याज छूट को लेकर वित्त मंत्रालय ने जारी किया यह दिशानिर्देश

अभी बैंक जो भी कंज्यूमर लोन जैसे होम लोन, कार लोन वगैरह देते हैं उसका रिस्क वेट दो तरीकों से तय होता है. रिस्क वेट मतलब बैंक ये एनालिसिस करता है कि किसी विशेष लोन को देने में जोखिम कितना है, इस हिसाब से वो उस लोन की प्रॉविजनिंग करते हैं. ये हैं वो दो तरीके Also Read - अगर कोई काम हो तो जल्द निपटा लें, अक्टूबर में 15 दिन बंद रहेंगे बैंक, जानिए

-पहला, लोन का साइज, यानी कितना लोन दिया जा रहा है
-दूसरा, Loan to value – कर्ज लेने वाले ने कुल लोन का कितना डाउन पेमेंट के तौर पर दिया है और कितना पैसा बैंक ने फाइनेंस किया है. ये इसका अनुपात होता है.

रिजर्व बैंक के फैसले से प्रीमियम होम लोन पर ब्याज की दर सस्ती हो सकती है. इसका कारण यह है कि बैंक अब आसानी से ज्यादा होम लोन दे पाएंगे. होम लोन देने के बदले बैंकों को कैपिटल रिजर्व रखना पड़ता है. आरबीआई ने उसकी लिमिट घटा दी है, जिसके कारण बैंक अब ज्यादा आसानी से लोन बांट भी पाएंगे और इंट्रेस्ट रेट भी कम कर पाएंगे. रिजर्व बैंक ने इस नियम को 31 मार्च 2022 तक के लिए लागू किया है.

वर्तमान नियम के मुताबिक, अगर होम लोन 75 लाख से ज्यादा होता है तो बैंकों को 50 पर्सेंट कैपिटल रिजर्व रखना पड़ता है. रिस्क वेटेज ज्यादा होने के कारण बैंक ज्यादा इंट्रेस्ट रेट चार्ज करते हैं. इसे घटाकर अब 35 पर्सेंट कर दिया गया है. ऐसे में प्रीमियम होम लोन में बैंकों को कम कैपिटल रिजर्व में रखना होगा. इसके कारण बैंकों के पास बिजनेस के लिए ज्यादा पैसे होंगे और वह होम लोन पर इंट्रेस्ट रेट भी कम करेंगे.

रिस्क वेटेज को LTV से लिंक करने से लोन देने का दायरा बढ़ेगा, बैंक्स कम जोखिम पर ज्यादा से ज्यादा लोन दे सकेंगे. लोन के लिए बैंकों की प्रॉविजनिंग भी कम होगी. साथ ही बड़े बड़े हाउसिंग लोन दिए जा सकेंगे.