RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लगातार चौथी बार रेपो रेट में कटौती की घोषणा की है. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 0.35 फीसदी घटाकर 5.40 प्रतिशत कर दिया है. इससे कर्ज सस्ते होने की उम्मीद है और ग्राहकों पर EMI का बोझ हल्का होगा.

रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर अनुमान 7 प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है. रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति के लिए नरम रुख बरकरार रखा है. उसने कहा कि महंगाई दर लक्ष्य के दायरे में ही रहेगी. आरबीआई ने कहा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में 3.1 प्रतिशत तथा दूसरी छमाही में 3.5 से 3.7 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है. मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 1, 3 और 4 अक्टूबर, 2019 को होगी.

महंगाई दर के नियंत्रण में होने के साथ विशेषज्ञों ने पहले ही उम्मीद जताई थी कि रिजर्व बैंक आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए लगातार चौथी बार नीतिगत दर में कटौती कर सकता है. एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हुई थी.

विशेषज्ञों के मुताबिक मुद्रास्फीति के आरबीआई के संतोषजनक स्तर पर होने, ऑटो सेक्टर में सुस्ती, बुनियादी ढांचा उद्योग में नाममात्र वृद्धि, मॉनसून को लेकर चिंता तथा शेयर बाजार में गिरावट को देखते हुए नीतिगत दर में एक और कटौती जरूरी थी. नीतिगत दर में कटौती के साथ उद्योग जगत छह सदस्यीय एमपीसी से यह सुनिश्चित करने की भी उम्मीद कर रहा है कि बैंक दर में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचे. इसके साथ ही उद्योग जगत आर्थिक तंत्र में नकदी की स्थिति में सुधार पर भी जोर दे रहा है.