भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन की बैठक के बाद केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती करने की घोषणा की. मुद्रास्फीति के नियंत्रण में रहने और आर्थिक वृद्धि पर दबाव को देखते हुए रिजर्व बैंक ने ये कदम उठया है. आरबीआई ने इस मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक में रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 5.15 फीसदी कर दिया है, जिससे इस साल रेपो दर में कुल कटौती 135 आधार अंक पहुंच गई है. पहले ये दर 5.40 फीसदी थी. नौ सालों में पहली बार रेपो रेट इतना कम हुआ है. रिवर्स रेपो रेट 4.90 फीसदी कर दिया गया है और बैंक रेट 5.40 फीसदी हो गया है.


इसके अलावा अपनी समीक्षा के दौरान रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.1 प्रतिशत किया. हालांकि रिजर्व बैंक ने आर्थिक वृद्धि की गति बढ़ाने के मद्देनजर मौद्रिक नीति में समायोजन बिठाने वाला नरम रुख बरकरार रखा है. रिजर्व बैंक ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार के प्रोत्साहन उपायों से निजी क्षेत्र में खपत बढ़ेगी साथ ही निजी निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी. बैंक ने कहा कि मौद्रिक नीति में कटौती का लाभ आगे ग्राहकों तक पहुंचाने का काम आधा- अधूरा है.

क्या होता है रेपो रेट कम होने से फायदा
रेपो रेट कम होने से ग्राहकों को काफी फायदा पहुंचता है. हालांकि ये आपकी बैंक पर निर्भर करता है कि वो आपको कितना फायदा दे रही है. क्योंकि रेपो रेट कम होने से बैंकों पर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव रहेगा. इससे लोगों को लोन सस्ते में मिल जाएगा. इसके अलावा जो होम, ऑटो या अन्य प्रकार के लोन फ्लोटिंग रेट पर लिए गए हैं, उनकी ईएमआई में भी कमी हो जाएगी.

गौरतलब है कि एमपीसी की छह सदस्यीय समिति की तीन दिन की बैठक एक अक्टूबर को शुरू हुई थी। दो अक्टूबर को गांधी जयंती का अवकाश रहा। बृहस्पतिवार को दूसरे दिन की बैठक हुई और बैठक के नतीजों की घोषणा शुक्रवार को की गई। उल्लेखनीय है कि सरकार ने सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए हाल में कई कदम उठाए हैं। कॉरपोरेट कर की दर में बड़ी कटौती की गई है, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर लगाया गया बढ़ा अधिभार वापस ले लिया गया। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर पांच प्रतिशत पर आ गई है जो इसका छह साल का निचला स्तर है।