रिजर्व बैंक ने रेपो दर 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत करने की घोषणा की है. वर्तमान में रेपो दर 6.50 प्रतिशत था. आरबीआई के इस फैसले से होम लोन सहित तमाम लोन पर ईएमआई घटने की संभावना है. शक्तिकांत दास के गवर्नर बनने के बाद केंद्रीय बैंक ने पहली बार अपनी मौद्रिक समीक्षा नीति जारी की है. इस नीति में महंगाई दर के चार फीसदी से नीचे रहने के कारण अर्थव्यस्था की स्थिति ठीक बताई गई है. पिछले तीन बार से अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने रेपो दरों को लेकर यथास्थिति बरकरार रखी थी. उससे पहले चालू वित्त वर्ष की अन्य दो समीक्षाओं में प्रत्येक बार उसने दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की थी. अगस्त 2017 के बाद पहली बार आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती की है.

इससे पहले रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक मंगलवार को शुरू हुई थी. छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने की. मौद्रिक नीति समिति के चार सदस्यों ने नीतिगत दर में कटौती के पक्ष में जबकि दो सदस्यों ने इसके खिलाफ अपना मत दिया. यह चालू वित्त वर्ष की छठी और आखिरी मौद्रिक नीति समीक्षा है.

आरबीआई ने मार्च तिमाही के लिए प्रमुख मुद्रास्फीति अनुमान घटाकर 2.8 प्रतिशत कर दिया है. अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिए यह अनुमान 3.2 से 3.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के लिए 3.9 प्रतिशत किया गया है. समिति के दो सदस्यों चेतन घाटे और विरल आचार्य ने नीतिगत दर यथावत रखने के पक्ष में मत दिया. रिजर्व बैंक के रुख को बदलकर तटस्थ करने का फैसला आम सहमति से किया गया.

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019-20 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत तक रहने का अनुमान जताया. वित्त वर्ष 2018-19 के लिए यह अनुमान 7.2 प्रतिशत रखा गया है. आरबीआई का मानना है कि केंद्रीय बजट प्रस्तावों से खर्च योग्य आय बढ़ने से मांग को गति मिलेगी, असर दिखने में समय लग सकता है. आरबीआई ने मार्च 2019 तिमाही के लिए खुदरा मुद्रास्फीति अनुमान संशोधित कर 2.8 प्रतिशत किया.

आम तौर पर एमपीसी अपनी समीक्षा को दोपहर में जारी करती है. इस बार रिजर्व बैंक ने इसे सुबह में ही जारी कर दिया. विशेषज्ञों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि एमपीसी मौद्रिक स्थिति के संबंध में अपने मौजूदा ‘सोच-विचार’ वाले रुख को ‘तटस्थ’ कर सकती है क्योंकि मुद्रास्फीति दर नीचे बनी हुई है.