
Anjali Karmakar
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से मास कॉम में मास्टर्स डिग्री. 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव. पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल न्यूज, बिजनेस और स्पोर्ट्स में खास दिलचस्पी. दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, ... और पढ़ें
सितंबर 2025 में भारत की खुदरा महंगाई (CPI Inflation) घटकर 1.54% पर आ गई है. सबसे बड़ी राहत खाने-पीने की चीजों से आई है. सब्जियों, दालों, तेल-घी और मसालों की कीमतों में लगातार गिरावट के कारण महंगाई दर तेजी से नीचे आई है. वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (थोक महंगाई) में भी 0.13% की गिरावट दर्ज हुई है. वहीं, अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के बोझ के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लोगों को 2 बड़ी राहत दे सकता है. मंगलवार को SBI रिसर्च की एक रिपोर्ट में इसकी संभावना जताई गई है.
दरअसल, दिसंबर की शुरुआत में RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की मीटिंग होनी है. SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI इस मीटिंग के दौरान ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर सकता है. इस कटौती के बाद रेपो रेट घटकर 5.25% रह जाएगा. अगर ऐसा होता है तो लोन और ब्याज की दरें काफी कम हो सकती हैं. इससे आखिरकार आम आदमी पर EMI का बोझ कम होगा. वहीं, कारोबारियों को भी बड़ी राहत मिल सकती है. इसके अलावा RBI रिलीफ पैकेज का ऐलान भी कर सकती है.
मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी क्या है?
मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी में 6 मेंबर होते हैं. इनमें 3 तो RBI के होते हैं और बाकी 3 को केंद्र सरकार अपॉइंट करती है. ये कमिटी प्राइस स्टेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी बनाती है. इसके साथ ही रेपो रेट तय करती है.
ये हैं MPC के 6 मेंबर
अभी MPC के 6 मेंबर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा, RBI के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. राजीव रंजन, RBI के डिप्टी गवर्नर M राजेश्वर राव, डॉ. नागेश कुमार (डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव, औद्योगिक विकास अध्ययन संस्थान, नई दिल्ली), सौगता भट्टाचार्य (अर्थशास्त्री), प्रोफेसर राम सिंह (डायरेक्टर, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दिल्ली यूनिवर्सिटी) है.
कब होगी मीटिंग?
ये मीटिंग आमतौर पर हर दो महीने में होती है. MPC की पिछली मीटिंग 29 से 1 अक्टूबर तक हुई थी. ये इस फाइनेंशियल ईयर की चौथी मीटिंग थी.अब 3 से 5 दिसंबर को MPC की पांचवीं मीटिंग होनी है. जबकि फाइनेंशियल ईयर की आखिरी मीटिंग 4 से 6 फरवरी 2026 को प्रस्तावित है.
RBI ने कब-कब घटाया रेपो रेट?
RBI ने फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था. मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी. दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई. जून में तीसरी बार दरों में 0.50% कटौती हुई. यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने तीन बार में ब्याज दरें 1% घटाई. लेकिन, अक्टूबर में हुई मॉनेटरी पॉलिसी में RBI ने रेपो रेट में कटौती न करने का फैसला लिया था. इसलिए अभी रेपो रेट 5.5% पर बरकरार है.
RBI ने रेपो रेट घटाया तो लोगों को क्या फायदा?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को शॉर्ट टर्म लोन देता है. रेपो रेट में कटौती से बैंकों के लिए पैसा लेना सस्ता हो जाता है. इसके नतीजे में बैंक भी लोगों को कम ब्याज दर पर लोन देते हैं. मतलब अगर RBI ने दिसंबर की मीटिंग में एक बार फिर से रेपो रेट घटा दिया, तो लोगों का होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन या पर्सनल लोन लेना सस्ता हो जाएगा. उनकी EMI कम हो जाएगी.
SBI की रिपोर्ट में बताया गया कि 2019 में GST दरों में कटौती से महंगाई में करीब 35 बेसिस पॉइंट की कमी आई थी. इसलिए अभी ब्याज दरों में कटौती का सही समय है. अगर RBI ने अब दरें नहीं घटाईं, तो यह एक ‘टाइप 2 एरर‘ होगा. यानी सही मौके पर गलत फैसला लेना.
रिलीफ पैकेज में क्या हो सकता है?
जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है. ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम करने के साथ-साथ रिलीफ पैकेज का ऐलान भी करता है. चूंकि, ट्रंप के टैरिफ लगाए जाने से लोड बढ़ रहा था. इसलिए सरकार ने बीते महीने GST के रेट घटा दिए. अब SBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए एक राहत पैकेज का ऐलान हो सकता है. जिससे मार्केट को थोड़ी एनर्जी मिल सकती है. रिलीफ पैकेज में क्या-क्या होगा, फिलहाल रिपोर्ट में इसकी जानकारी नहीं दी गई है.
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