मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष (2019-20) की पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख ब्याज दर रेपो रेट (Repo Rate) में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की घोषणा की है. रेपो रेट वह दर है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. RBI की इस घोषणा के बाद अब रेपो रेट 6.25 प्रतिशत से घटकर 6 फीसदी हो जाएगी. केंद्रीय बैंक के इस फैसले से लोगों को होम और ऑटो लोन की EMI में राहत मिलने की उम्मीद है. मौद्रिक नीति समिति के 6 में से 4 सदस्यों ने रेपो रेट घटाने का समर्थन किया, जबकि दो सदस्यों की राय थी कि ने रेपो दर स्थिर रखी जाए.

इससे पहले फरवरी में भी रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कमी की गई थी. इस बार भी विशेषज्ञों ने अनुमान जताया था कि महंगाई दर में कमी और औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार सुस्त होने के मद्देनजर आरबीआई रेपो रेट में कटौती कर सकता है.

इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2018- 19 की चौथी तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति का संशोधित अनुमान घटाकर 2.40 प्रतिशत किया है. इसके अलावा वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 2.90 से 3.0 प्रतिशत और दूसरी छमाही के लिए 3.50 से 3.80 प्रतिशत रखा गया है.

पिछले वित्त वर्ष (2018-19) की अंतिम द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक के दौरान फरवरी में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट घटाने के पक्ष में मतदान किया था. फरवरी में रेपो रेट 25 आधार अंक घटाकर 6.25 फीसदी कर दिया गया था. पिछले डेढ़ साल में रेपो रेट में यह पहली कटौती थी.