नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ने बुधवार को रेपो रेट में किसी तरह का कोई भी बदलाव नहीं किया है. छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने तीन दिवसीय समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 6.5 फीसदी ही रखने का फैसला लिया है. दूसरी तरफ रिवर्स रेपो रेट और बैंक रेट 6.25 और 6.75 फीसदी पर इस बार भी कायम हैं. बता दें कि पिछली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में भी आरबीआई ने रेपो रेट को 6.5 फीसदी ही रखा था. रेपो रेट वो दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक व्यावसायिक बैंकों को कर्ज देता है. दूसरी तरफ रिवर्स रेपो वो दर होती है जिस पर केंद्रीय बैंक व्यावसायिक बैंकों से कर्ज लेता है.

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2018-19 की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने के अनुमान को बरकरार रखा है. चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति 2.7 से 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है. अगले वित्त वर्ष की छमाही में यह 3.8 से 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

इससे पहले केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी थी कि तेल के दामों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय स्थिति, विकास और मुद्रास्फिती के सामने एक चुनौती है. पिछली मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ था. इतना ही रुपया 70 के स्तर से नीचे आ गया. कच्चे तेल की बात करें तो वैश्विक स्तर पर इसपर भी असर पड़ा और 86 डॉलर प्रति बैरल से नीचे होते हुए 60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.

आर्थिक वृद्धि दर की बात करें तो यह सितंबर तिमाही में 7.1 फीसदी रही. इससे पहले अप्रैल-जून की तीमाही में में यह दो साल के उच्च स्तर 8.2 प्रतिशत पर पहुंच गई थी.