सेकेंड हैंड प्रॉपर्टी खरीदने का बना रहे प्लान? 5 बातों को इग्नोर किया तो पैसे डूबना तय, डील से पहले जरूर चेक करें ये दस्तावेज

बैंक समय-समय पर नीलामी के जरिए प्रॉपर्टी, प्लॉट, घर या फ्लैट बेचते हैं. ये ऐसी प्रॉपर्टी होती है, जिनके लिए बायर्स ने होम लोन लिया था, लेकिन किस्तें चुका नहीं पाएं. डिफॉलटर्स बायर्स की इन प्रॉपर्टी को बैंक अपने कब्जे में ले लेता है. बाद में इन्हें सेकेंड पार्टी को नीलामी के जरिए बेचा जाता है.

Published date india.com Published: October 7, 2025 9:02 PM IST
सेकेंड हैंड प्रॉपर्टी खरीदने का बना रहे प्लान? 5 बातों को इग्नोर किया तो पैसे डूबना तय, डील से पहले जरूर चेक करें ये दस्तावेज
कोई भी सेकेंड प्रॉपर्टी खरीदने से पहले आपको लोकेशन पर जाकर प्रॉपर्टी को जरूर देखना चाहिए.

हममें से हर किसी का सपना एक दिन खुद का घर खरीदने या बनाने का होता है. अपना घर खरीदने या बनवाने के लिए हम जी-तोड़ मेहनत करते हैं. तिनका-तिनका जोड़कर फंड बनाते हैं. होम लोन लेते हैं और जरूरत पड़ने पर अपने गहने तक गिरवी रख देते हैं. लेकिन, प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमत के बीच अपनी पसंद और बजट का घर या फ्लैट मिलना मुश्किल हो जाता है.

अगर आप प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो आपके पास रीसेल प्रॉपर्टी खरीदने का ऑप्शन रहता है. इसे आम बोलचाल में सेकेंड हैंड प्रॉपर्टी खरीदना भी कहते हैं. बैंक ऑक्शन के जरिए कम कीमत में घर खरीदा सकते हैं. हालांकि, संपत्ति में किया जाने वाला निवेश काफी बड़ा होता है, लिहाजा इस प्रक्रिया के दौरान की गई कोई भी गलती भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. इसलिए सेकेंड हैंड प्रॉपर्टी खरीदने से पहले आपको 5 बातों की तस्दीक कर लेनी चाहिए. साथ ही कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट भी जरूर चेक करना चाहिए, ताकि डील के बाद किसी तरह का पछतावा न हो.

कहां मिलती है सेकेंड हैंड प्रॉपर्टी?
बैंक समय-समय पर नीलामी के जरिए प्रॉपर्टी, प्लॉट, घर या फ्लैट बेचते हैं. ये ऐसी प्रॉपर्टी होती है, जिनके लिए बायर्स ने होम लोन लिया था, लेकिन किस्तें चुका नहीं पाएं. डिफॉलटर्स बायर्स की इन प्रॉपर्टी को बैंक अपने कब्जे में ले लेता है. बाद में इन्हें सेकेंड पार्टी को नीलामी के जरिए बेचा जाता है. इसमें बैंक मॉर्टगेज यानी बैंक के पास गिरवी रखी हुई प्रॉपर्टी (रेंसिडेंशियल और कमर्शियल) नीलाम करता है. इस प्रक्रिया में कई बार खरीदारों को बाजार से कम कीमत पर घर या जमीन मिल जाता है.

कौन खरीद सकता है ऐसी प्रॉपर्टी
बैंकों की ये नीलामी वाली प्रॉपर्टी हर कोई खरीद सकता है. इसमें किसी भी तरह का बैन नहीं है. इसके लिए आपको https://ibapi.in इस लिंक पर जाना होगा. आप यहां जिस राज्य या जिले की प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, उसके बारे में चेक कर सकते हैं. हालांकि, अगर आप कई बैंकों की एक साथ प्रॉपर्टी देखना चाहते हैं तो यह भी संभव है. आपको कई प्रॉपर्टी मिल जाएंगी.

कैसे मिलेगी ई-नीलामी की जानकारी
बैंक और हाउंसिंग फाइनेंसिंग कंपनियां समय-समय पर अखबारों में ऐसी प्रॉपर्टी की नीलामी के एड देती हैं. बैंकों और दूसरी फाइनेंसिंग कंपनियों की ऑफिशियल पेज पर भी एड दिया जाता है. इसके अलावा https://ibapi.in पर सभी बैंकों की प्रॉपर्टी और उनकी डिटेल जाती है. आपको सर्च प्रॉपर्टी में जाना होगा. वहां पर आपको बैंक का नाम भरना होगा और राज्य, जिला वगैरह चुनना होगा.

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किन 5 बातों का रखें ध्यान?

  1. कोई भी सेकेंड प्रॉपर्टी खरीदने से पहले आपको लोकेशन पर जाकर प्रॉपर्टी को जरूर देखना चाहिए. इससे आपको फ्लैट या घर की क्वालिटी, मेंटेनेंस और बाकी चीजें परखने में आसानी होगी. बैंक ऐसी प्रॉपर्टी, घर या फ्लैट को खरीदने से पहले साइट विजिट करने की परमिशन देते हैं.
  2.  ऐसी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले प्रॉपर्टी के स्वामित्व के बारे में रिसर्च कर लें. टाइटल डीड सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक है, जिसे घर या कुछ और खरीदने से पहले वेरिफाई किया जाना चाहिए. यह मालिक के अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में बताता है.
  3. इस बात को भी कंफर्म करना जरूरी है कि जिस जमीन पर प्रॉपर्टी खड़ी है, वह कानूनी रूप से खरीदी गई है और निर्माण के लिए सभी जरूरी अनुमतियां ले ली गई हैं. ये सब खुद से नहीं समझ जा रहा हो तो किसी वकील की मदद लें.
  4. देनदारी सर्टिफिकेट मकान एक मूर्त संपत्ति है. उस पर स्थानीय नगर निगम की ओर से टैक्स लगाया जाता है. इसलिए ये वेरिफाई करना जरूरी है कि उस पर कोई बकाया नहीं है. इसके लिए खरीदार को देनदारी (एन्कम्ब्रन्स) सर्टिफिकेट की जांच करनी चाहिए. इसे सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से हासिल किया जा सकता है.
  5. अगर आप किसी डेवलपर से फ्लैट, जमीन या घर जैसी कोई संपत्ति खरीद रहे हों, तब आपको कमेंसमेंट सर्टिफिकेट जरूर चेक करना चाहिए. ताकि कंस्ट्रक्शन क्लियरेंस का पता चल सके. इसमें बताया जाता है कि स्थानीय अधिकारियों से जरूरी मंजूरी, लाइसेंस और परमिशन मिलने के बाद ही कंस्ट्रक्शन शुरू हुआ है.

इन डॉक्यूमेंट की जांच भी जरूरी

लेआउट या भवन योजना: घर खरीदारों को सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि ऐसे मामले सामने आए हैं जहां डेवलपर्स अतिरिक्त मंजिलों को जोड़कर या खुले क्षेत्रों को कम करके लेआउट से अलग हटकर कंस्ट्रक्शन कर देते हैं. इससे बाद में दिक्कतें आ सकती हैं.

ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट: आखिर में आपको ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट भी देखना चाहिए. इसमें लिखा होता है कि प्रॉपर्टी बनाने में जरूरी निर्देशों का पालन हुआ है या नहीं.

अगर आपने सेकेंड हैंड प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इन तमाम बातों का ध्यान रखा, तो आप न सिर्फ एक अच्छी डील कर पाएंगे, बल्कि भविष्य में किसी भी धोखे से भी बच जाएंगे.

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