नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर उर्जित पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. पटेल ने कहा है कि वह निजी कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं. हालांकि कुछ समय से सरकार से उनके विवाद की खबरें सामने आ रही थीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर, 2016 को जब नोटबंदी की घोषणा की गई थी, उस समय उर्जित पटेल ही आरबीआई के गवर्नर थे. उन्हें 4 सितंबर, 2016 को आरबीआई गवर्नर बनाया गया था. साल 2013 में वह आरबीआई के डिप्टी गवर्नर बने थे. उनका कार्यकाल सितंबर 2019 में पूरा होने वाला था. लेकिन 10 महीने पहले ही पटेल ने अपना पद छोड़ दिया है. Also Read - YES बैंक से प्रतिबंध हटा, सभी बैंकिंग सर्विसेज चालू, ग्राहकों ने शुरू किया पैसे निकालना

बुधवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच चल रहे विवाद  पर उर्जित पटेल ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था.  पटेल से इस विषय में तीन सवाल किए गए थे, लेकिन उन्होंने कहा था, ‘मैं इन सवालों से बचना चाहूंगा, क्योंकि हम यहां मौद्रिक नीति समीक्षा पर चर्चा कर रहे हैं.’ इससे पहले पिछले महीने की शुरुआत में ही कई मीडिया रिपोर्ट के हवाले से यह दावा किया गया था कि RBI की बोर्ड मीटिंग के बाद पटेल इस्तीफा दे सकते हैं. हालांकि इसके पीछे पटेल की सेहत को भी एक वजह बताया गया था. सोमवार को भी उनके इस्तीफे के पीछे निजी कारण ही बताया गया है. Also Read - RBI का नया नियम, डेबिट-क्रेडिट कार्डधारक आज से नहीं कर सकेंगे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन!

मीडिया रिपोर्ट में दावा: आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल इस तारीख को दे सकते हैं इस्तीफा

बता दें कि भारत सरकार द्वारा रिजर्व बैंक पर अधिक कर्ज देने संबंधी दबाव बनाने को लेकर उर्जित पटेल और सरकार के बीच पिछले एक महीने से ज्यादा समय से गतिरोध चल रहा था. इसको लेकर कई बार वित्त मंत्री और बैंक की तरफ से बयान भी आए थे. सरकार की तरफ से कहा गया था कि अधिक कर्ज देने के लिए नियमों में ढील देने और 9.6 लाख करोड़ रुपए की आरक्षित राशि में से कम-से-कम एक तिहाई राशि के हस्तानांतरण के लिए वह केंद्रीय बैंक पर दबाव देना जारी रखेगी. इसको लेकर बैंक की तरफ से विरोध जताया गया था. केंद्रीय बैंक सरकार की इस राय से सहमत नहीं था. बैंक की तरफ से कहा गया था कि वह अपने बही-खाते को मजबूत रखने के लिए अपने पास लाभांश रखना चाहता है.