मुंबईः अर्थव्यवस्था में संभावित सुस्ती की चिंताओं से जूझ रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के हाथों मानो कोई लॉ़टरी लग गई है. यह भी कोई छोटी-मोटी लॉटरी नहीं बल्कि लगता है कि उसके लिए खजाना ही खुल गया है. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1.76 लाख करोड़ रुपये का लाभांश और आरक्षित कोष का एक हिस्सा सरकार के खजाने में डालने का फैसला किया है. अर्थव्यवस्था में संभावित संकट के वक्त सरकार को इतनी बड़ी रकम का मिलना किसी लॉटरी से कम नहीं है. मोदी सरकार के लिए इसको लॉटरी इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि इस साल के बजट में सरकार ने रिजर्व बैंक से 90 हजार करोड़ रुपये मिलने की बात कही गई थी. ऐसे में इतनी बड़ी रकम मिलने से सरकार को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करते हुए अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए प्रोत्साहन पैकेज देने में मदद मिलेगी.

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने पूर्व गवर्नर विमल जालान समिति की सिफारिशों को अमल में लाते हुए रिकार्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये का लाभांश और अधिशेष आरक्षित कोष सरकार को हस्तांतरित करने का फैसला किया. इससे नरेंद्र मोदी सरकार को राजकोषीय घाटा बढ़ाए बिना सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी. केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने 1,76,051 करोड़ रुपये सरकार को हस्तांतरित करने का निर्णय किया है. इसमें 2018-19 के लिये 1,23,414 करोड़ रुपये का अधिशेष और 52,637 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्रावधान के रूप में चिन्हित किया गया है. अतिरिक्त प्रावधान की यह राशि आरबीआई की आर्थिक पूंजी से संबंधित संशोधित नियमों (ईसीएफ) के आधार पर निकाली गयी है. रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई के पास इस वक्त 2.3 लाख करोड़ रुपये का आपात कोष है जिसमें से वह 52,637 करोड़ रुपये सरकार देगी. इसी तरह 1,23,414 करोड़ रुपये के अधिशेष में आरबीआई ने इस साल मार्च में 28 हजा करोड़ रूपये अंतरिम तौर पर सरकार को दे दिया था. इस तरह इस वित्त वर्ष में वह और 95,414 हजार करोड़ रुपये का कोष हस्तांतरित करेगा.

बिमल जालान समिति (Bimal Jalan committee) की सिफारिशों पर फैसला

रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद यह कदम उठाया है. समिति को यह तय करने को कहा गया था कि केंद्रीय बैंक के पास कितनी आरक्षित राशि होनी चाहिए. सरकार की तरफ से वित्त सचिव राजीव कुमार इस समिति में शामिल थे. समिति ने 14 अगस्त को अपनी रपट को अंतिम रूप दिया था.

आरबीआई से प्राप्त राशि से सरकार को अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के प्रयासों में मदद मिलेगी. उल्लेखनीय है कि देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पांच वर्ष के निचले स्तर पर पहुंच गयी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार के लिये पिछले सप्ताह विभिन्न कदमों की घोषणा की. हालांकि, सरकार की कोशिश राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 प्रतिशत पर सीमित रखने की है. इससे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच आरबीआई में अधिशेष राशि की सीमा तय करने को लेकर गतिरोध की स्थिति बन गयी थी.

परिणामस्वरूप आरबीआई ने नवंबर, 2018 की अहम बोर्ड बैठक में रिजर्व बैंक की ईसीएफ की समीक्षा के लिए एक समिति के गठन का निर्णय किया था. हालांकि, समिति के गठन से पहले ही पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. रिजर्व बैंक 2013- 14 से ही अपनी खर्च योग्य आय में से 99 प्रतिशत राशि सरकार को देता आया है. सरकार को राजकोषीय घाटे को अंकुश में रखने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.

(इनपुट भाषा)