नई दिल्ली: प्याज सहित अन्य सब्जियों, दाल और मांस, मछली जैसी प्रोटीन वाली वस्तुओं के दाम चढ़ने से नवंबर माह में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई. यह इसका तीन साल का उच्चस्तर है. तीन साल पहले जुलाई, 2016 में खुदरा मुद्रास्फीति 6.07 प्रतिशत दर्ज की गई थी. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इसी साल अक्टूबर में 4.62 प्रतिशत और एक साल पहले नवंबर, 2018 में 2.33 प्रतिशत रही थी.

 

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार माह के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 10.01 प्रतिशत पर पहुंच गई. अक्टूबर में यह 7.89 प्रतिशत तथा एक साल पहले इसी महीने में यह शून्य से 2.61 प्रतिशत नीचे थी. नवंबर 2019 में सबसे ज्यादा सब्जियों के दाम में 35.99 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई. अक्टूबर में यह 26.10 प्रतिशत थी. इसी तरह नवंबर में मोटे अनाज की मुद्रास्फीति बढ़कर 3.71 प्रतिशत पर पहुंच गई. मीट और मछली की मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 9.38 प्रतिशत बढ़ी. अंडे में भी नवंबर में 6.2 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई. दालों और उससे जुड़े उत्पादों की मुद्रास्फीति माह के दौरान बढ़कर 13.94 प्रतिशत रही. ईंधन और प्रकाश श्रेणी में कीमतों में 1.93 प्रतिशत की गिरावट आई. सरकार ने रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के दायरे में (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) रखने का लक्ष्य दिया है.

2020 की शुरुआत में सब्जियों के दाम नीचे आने से मिलेगी राहत
इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि 2020 की शुरुआत में सब्जियों के दाम नीचे आने से खाद्य मुद्रास्फीति पर काफी हद तक अंकुश लगेगा. भूजल और जलाशयों के बेहतर स्तर से रबी उत्पादन और मोटे अनाजों का उत्पादन अच्छा रहेगा. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रबी दलहन और तिलहन के बुवाई क्षेत्र में सालाना आधार पर जो गिरावट आई है वह चिंता का विषय है. नायर ने कहा कि इक्रा का अनुमान है कि दिसंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 5.8 से 6 प्रतिशत के बीच रहेगी, जो रिजर्व बैंक के मध्यम अवधि के लक्ष्य का उच्चस्तर होगा. ऐसे में हमारा अनुमान है कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) फरवरी की मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों को यथावत रखेगी.

खाद्य वस्तुओं के दाम चढ़ने से हुआ ऐसा
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख राहुल गुप्ता ने कहा कि मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं के दाम चढ़ने से नवंबर में मुद्रास्फीति 40 महीने के उच्चस्तर पर पहुंच गई है. गुप्ता ने कहा कि रिजर्व बैंक ने इस महीने पेश मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में बदलाव नहीं किया है. यदि मुद्रास्फीति और बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक फरवरी की मौद्रिक समीक्षा में भी दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा.