नई दिल्ली: कोरोना वायरस की महामारी के बीच बने हालात के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 20 हजार करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सूक्ष्म राशि के ऋण देने वाले संस्थानों (एमएफआई) के लिए मुश्किल के इस दौर में 30,000 करोड़ रुपए के विशेष नकदी योजना की घोषणा की. इस कदम का मकसद कोरोना वायरस संकट के बीच इस क्षेत्र को ऋण के जरिये मदद उपलब्ध कराना है.Also Read - Omicron के खतरे के बीच NTAGI की बैठक आज, बच्चों को टीका और Booster Dose पर होगा फैसला!

ये उपाय 20 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज का हिस्सा है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को की. Also Read - Jawahar Navodaya Vidyalaya: नवोदय विद्यालय के 59 छात्र समेत 69 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसके अलावा निम्न साख रखने वाले एनबीएफसी, आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) के लिए 45,000 करोड़ रुपए की आंशिक ऋण गारंटी (पार्शियल क्रेडिट गारंटी) योजना 2.0 की भी घोषणा की. इस पहल का मकसद है कि ये कंपनियां व्यक्तियों तथा एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) क्षेत्र की इकाइयों को अधिक कर्ज सहायता दे सकें. Also Read - Omicron Cases Update: अब महाराष्‍ट्र में मिला ओमीक्रोन का नया केस, देश में अब तक कुल 4 केस

मंत्री ने कहा कि 30,000 करोड़ रुए की विशेष नकदी योजना के तहत प्राथमिक और द्वितीयक बाजार इन संस्थानों के निवेश स्तर के निवेश योग रिण-पत्रों में निवेश किया जाएगा. इन प्रतिभूतियों को सरकार पूर्ण रूप से गारंटी देगी.

सीतारमण ने कहा कि इससे इन संस्थानों और म्यूचुअल फंड को नकदी उपलब्ध होगी और बाजार में एक भरोसा बनेगा. उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को बांड बाजारों से पैसा जुटाने में कठिनाइयों का सामा करना पड़ता है.

आंशिक ऋण गारंटी योजना 2.0 (पीसीजीएस) के बारे में सीतारमण ने कहा कि निम्न साख वाले एनबीएफसी, एचएफसी और एमएफआई को लोगों तथा एमएसएमई को कर्ज देने के लिए नकदी की जरूरत है. मौजूदा पीसीजीएस का विस्तार कर इन इकाइयों के बांड/वाणिज्यक पत्रों को इसके दायरे में लाया जाएगा.

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि पहले 20 प्रतिशत नुकसान का वहन गारंटी देने वालों को करना होगा और वह सरकार है. इसके तहत और उससे नीचे की रेटिंग (बिना रेटिंग वाले समेत) वाले बांड निवेश के लिए पात्र होंगे. यह एमएफआई के लिए फायदेमंद है.