Rules And Process Of Mutual Fund Transfer After Investor Death Tax Calculation
इंवेस्टर की मौत हो जाए तो किसे मिलेंगे म्यूचुअल फंड के पैसे? कितना देना पड़ेगा टैक्स, जान लें ये नियम
म्यूचुअल फंड में निवेश करने के बाद यह जरूरी है कि इंवेस्टर अपना नॉमिनी जरूर बनाए. इसके लिए यह जानना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड किसे और कैसे ट्रांसफर होता है.
म्यूचुअल फंड क्लेम करने के लिए सबसे पहले संबंधित फंड हाउस से संपर्क करना होता है.
स्मार्ट इंवेस्टमेंट की बात हो, तो म्यूचुअल फंड का जिक्र सबसे पहले आता है. म्यूचुअल फंड मार्केट से लिंक्ड होता है. इस स्कीम में महंगाई को मात देने की ताकत होती है. इसका औसत रिटर्न 12 से 15% तक होता है. म्यूचुअल फंड्स में आपको SIP और लंपसम, दोनों तरह से निवेश का ऑप्शन मिल जाता है. अगर आप इस स्कीम में लंबे समय तक निवेश करें तो मोटा फंड तैयार कर सकते हैं.
कभी आपने सोचा है कि अगर म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वाले व्यक्ति की अचानक मौत हो जाए, तो उसके पैसों का क्या होगा? क्या ये पैसा फंस जाता है या इसके लिए क्लेम किया जा सकता है? क्लेम करने का प्रोसेस क्या है, कौन-कौन से डॉक्यूमेंट लगते हैं.
इंवेस्टमेंट के साथ-साथ नॉमिनी बनाना जरूरी
म्यूचुअल फंड में निवेश करने के बाद यह जरूरी है कि इंवेस्टर अपना नॉमिनी जरूर बनाए. इसके लिए यह जानना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड किसे और कैसे ट्रांसफर होता है. सिंगल अकाउंट में निवेशक की मौत के बाद नॉमिनी पैसों के लिए क्लेम कर सकता है. अगर नॉमिनी मेंशन नहीं है, तो कानूनी उत्तराधिकारी भी क्लेम कर सकते हैं.
जॉइंट अकाउंट हो तो?
अगर म्यूचुअल फंड जॉइंट अकाउंट में है. पहले होल्डर की मौत अपडेट करवाने पर निवेश खुद-ब-खुद बाकी बचे होल्डर को ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन अगर सभी अकाउंट होल्डर की मौत हो जाती है. कोई नॉमिनी है, तो फंड उस नॉमिनी को ट्रांसफर कर दिया जाता है.
नॉमिनी नहीं है, तो कानूनी वारिस को ट्रांसफर होगा पैसा
अगर नॉमिनी नहीं है, तो कानूनी वारिसों को यह निवेश ट्रांसफर किया जाता है. वहीं, अगर अकाउंट किसी एक व्यक्ति के नाम पर था, तो नॉमिनी के होने पर उसे फंड दिया जाएगा. नॉमिनी न होने की स्थिति में कानूनी उत्तराधिकारी फंड के हकदार होंगे. अगर एक से ज्यादा नॉमिनी या वारिस हैं, तो निवेश को एनरोलमेंट डॉक्यूमेंट में दिए गए हिस्से के मुताबिक बांटा जाएगा.
अब जानिए क्लेम करने का प्रोसेस
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म्यूचुअल फंड क्लेम करने के लिए सबसे पहले संबंधित फंड हाउस से संपर्क करना होता है.
नॉमिनी, जॉइंट अकाउंट होल्डर या कानूनी वारिस को उस म्यूचुअल फंड कंपनी से बात करनी चाहिए, जिसमें मृतक ने निवेश किया था.
इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करने होते हैं. फंड हाउस सारी डॉक्यूमेंट और इंफॉर्मेशन की जांच करती है.
जानकारी सही पाए जाने पर 15 से 20 दिन के अंदर पैसा ट्रांसफर हो जाता है.
कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए?
म्यूचुअल फंड का पैसा क्लेम करने के लिए ट्रांसमिशन रिक्वेस्ट फॉर्म, इंवेस्टर का डेथ सर्टिफिकेट, क्लेम करने वाले का आधार और पैन कार्ड, बैंक डिटेल्स चाहिए. अगर कानूनी वारिस क्लेम कर रहे हैं, तो उन्हें इंडेम्निटी बॉन्ड, पर्सनल एफिडेविड और वैलिड वसीयत या उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की जरूरत होती है. अगर नॉमिनी नाबालिग है, तो उसका बर्थ सर्टिफिकेट और पेरेंट्स के KYC डॉक्यूमेंट भी देने पड़ेंगे.
क्या क्लेम के पैसों पर टैक्स लगेगा?
म्यूचुअल फंड ट्रांसफर पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता. अगर बाद में उन यूनिट्स को बेचा जाता है या डिविडेंड हासिल होता है, तो आपको टैक्स देना पड़ेगा. इसलिए, निवेश करते समय नॉमिनी की जानकारी सही रखना और परिवार को निवेश की डिटेल्स बताना बहुत जरूरी है. इससे भविष्य में कानूनी झंझटों से बचा जा सकता है.
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