RUSSIA-UKRAINE WAR IMPACT: रूस-यूक्रेन युद्ध से अभी और बढ़ेगी महंगाई, आम आदमी को ढीली करनी पड़ेगी जेब

RUSSIA-UKRAINE WAR IMPACT: रूस-यूक्रेन युद्ध से महंगाई अभी और बढ़ सकती है. इसके लिए आम आदमी को ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है. ऐसा माना जाता है कि तेल के दाम बढ़ने पर उपभोक्ता का खर्च बढ़ जाता है. जिससे वह अन्य आवश्यक वस्तुओं पर अपने खर्च को कम कर देता है. जिसका असर मांग और सेवा पर पड़ने लगता है.

Published date india.com Updated: April 1, 2022 1:35 PM IST
RUSSIA-UKRAINE WAR IMPACT: रूस-यूक्रेन युद्ध से अभी और बढ़ेगी महंगाई, आम आदमी को ढीली करनी पड़ेगी जेब

RUSSIA-UKRAINE WAR IMPACT | INFLATION| PETROL | DIESEL PRICE: रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (RUSSIA-UKRAINE WAR) का आज 37वां दिन है. युद्ध में अभी तक हजारों लोगों की मौतें हो चुकी हैं. यूक्रेन में हजारों इमारतें नेस्तनाबूत कर दी गई हैं. सड़कों पर जले हुए शव अभी भी बिखरे पड़े हो सकते हैं. एक तरह से रूसी सेना ने यूक्रेन को पूरी तरह से बर्बाद करके रख दिया है. इतनी बड़ी विनाशक तस्वीर ने पूरी दुनिया को भयभीत कर दिया है. जानकारों की राय है कि रूस-यूक्रेन युद्ध भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कयामत लाएगा, जिससे आने वाले दिनों में उथल-पुथल का सामना करना पड़ेगा.

पिछले 10 दिनों में 6 रुपये से ज्यादा बढ़े तेल के दाम

पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों (PETROL-DIESEL PRICE HIKE) में लगभग 6 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है. डीजल-पेट्रोल, सब्जियों, खाने-पीने की वस्तुओं, गैस की कीमतों और कारों तक के दामों में भारी बढ़ोतरी की गई है. यह सब एक दिन में नहीं हो रहा है. यह सब धीरे-धीरे हो रहा है. अभी आम लोगों को अर्थव्यवस्था पर युद्ध के प्रभाव का खामियाजा भुगतना होगा.

ईंधन पर खर्च बढ़ने से आवश्यक खर्चों में होती है कटौती

जब कोई भी व्यक्ति पेट्रोल और डीजल (PETROL-DIESEL PRICE) के लिए ज्यादा भुगतान करने लगता है तो उसे अपनी जरूरत की अन्य चीजों के लिए किए जाने वाले खर्चों पर कटौती करनी पड़ती है. इस तरह से अन्य वस्तुओं पर खर्च पर कम होने से सेवा और मांग दोनों में कमी आने लगती है. जिससे निर्माण और आयात समेत कई गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं.

महंगी होने वाली हैं कारें

कार निर्माता ने मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के साथ उच्च कच्चे माल और रसद लागत के कारण 1 अप्रैल से कीमतों में वृद्धि की घोषणा की है. स्टील और एल्युमीनियम जैसी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ अन्य कच्चे माल की लागत में वृद्धि भी कीमतों में वृद्धि को बढ़ावा दे रही है. घरेलू वाहन निर्माता टाटा मोटर्स से लेकर लग्जरी कार निर्माताओं तक, सभी सेगमेंट की कारों की कीमत अधिक होने वाली है.

  • बीएमडब्ल्यू कीमतों में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी करेगी
  • ऑडी अपने मॉडल रेंज के लिए कीमतों में 3 प्रतिशत की वृद्धि करेगी
  • टोयोटा अपने मॉडलों की कीमतों में 4 फीसदी की बढ़ोतरी करेगी
  • मर्सिडीज-बेंज अपने मॉडल रेंज के लिए कीमतों में 3 प्रतिशत की वृद्धि करेगी
  • टाटा मोटर्स कीमतों में 2-2.5 फीसदी की बढ़ोतरी करेगी
  • टोयोटा किर्लोस्कर कीमतों में 4 फीसदी की बढ़ोतरी करेगी
  • पिछले कुछ महीनों में, मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, हुंडई और होंडा ने उत्पादन में गिरावट दर्ज की है.
  • वैश्विक संकट और ईंधन की बढ़ती लागत के कारण कारें महंगी हो गई हैं.

फलों, सब्जियों समेत खाने के तेल के दाम बढ़े

ईंधन की कीमतों में वृद्धि का सबसे ज्यादा असर सब्जियों और फलों की कीमतों पर हुआ है. एक बार जब ईंधन की कीमतें बढ़ जाती हैं, तो इसके परिणामस्वरूप परिवहन लागत अधिक हो जाती है, जिससे फल और सब्जियों की कीमतें बढ़ जाती हैं. सब्जी और फलों के रेट में 10 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. बाजार में टमाटर, मिर्च, मटर, सेब और अनार की कीमतों में तेजी आई है.

आम आदमी का दर्द फल और सब्जियों की कीमतों पर नहीं रुकता है. इस युद्ध ने खाना पकाने के तेल की कीमतों को भी बढ़ा दिया है.

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देश में पैकेज्ड सूरजमुखी तेल की कीमत में फरवरी में 4 फीसदी, सरसों के तेल में 8.7 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है. मूंगफली तेल में 1 फीसदी और वनस्पति में 2.7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.

बता दें, देश का लगभग 70 प्रतिशत खाद्य तेल यूक्रेन से आता है. पिछले साल भारत के कुल खाद्य तेल आयात में यूक्रेन और रूस की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी थी. कुल मिलाकर, रूस-यूक्रेन दुनिया के 60 प्रतिशत सूरजमुखी तेल का उत्पादन करते हैं.

सूरजमुखी के तेल का 90 प्रतिशत आयात यूक्रेन से

भारत को सूरजमुखी के तेल का 90 प्रतिशत से अधिक यूक्रेन और रूस से प्राप्त होता है. यह आशंका है कि यदि युद्ध लंबे समय तक जारी रहा तो खुदरा कीमतें और खराब हो सकती हैं. मार्च 2021 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारत ने 10.5 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के लगभग 13.35 मिलियन टन खाद्य तेल का आयात किया.

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