नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 24 अक्टूबर को शीर्ष अदालत में निर्धारित बकाया समेकित सकल राजस्व (एजीआर) का स्व-मूल्यांकन या फिर से आकलन करने के लिए केंद्र और दूरसंचार कंपनियों को बुधवार को आड़े हाथ लिया. पीठ ने कहा कि एजीआर की बकाया राशि का 20 साल में भुगतान के लिए केंद्र का प्रस्ताव अनुचित है और दूरसंचार कंपनियों को शीर्ष अदालत के फैसले के अनुरूप बकाये की सारी राशि का भुगतान करना होगा. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने एजीआर के मुद्दे पर लगातार समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे लेखों पर नाराजगी वयक्त की और कहा कि इन सभी दूरसंचार कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा और भविष्य में समाचार पत्रों में ऐसे किसी भी लेख के लिए उन्हें न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया जायेगा. Also Read - Covid-19: कोरोना के चलते मजदूरों का पलायन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 23 लाख लोगों को दे रहे हैं खाना

पीठ ने दूरसंचार कंपनियों को एजीआर की बकाया राशि का भुगतान 20 साल में करने की अनुमति देने के लिए केन्द्र के आवेदन पर विचार करने से इंकार कर दिया. पीठ ने कहा कि इस आवेदन पर दो सप्ताह बाद विचार किया जाएगा. Also Read - कोरोना के कारण मजदूरों का पलायन: कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट, डर दहशत को बताया वायरस से भी बड़ी समस्या

पीठ ने सारे घटनाक्रम पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि दूरसंचार कंपनियों द्वारा एजीआर के स्व-मूल्यांकन की अनुमति देकर हम न्यायालय के अधिकारों का अतिक्रमण करने की इजाजत नहीं दे सकते.

पीठ ने कहा कि न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद एजीआर के बकाये के मुद्दे का निबटारा किया है और उस समय सरकार ने ब्याज और जुर्माने की राशि के लिये जोरदार दलीलें दी थीं.

पीठ ने कहा कि एजीआर की बकाया राशि का 20 साल में भुगतान के लिए केंद्र का प्रस्ताव अनुचित है और दूरसंचार कंपनियों को शीर्ष अदालत के फैसले के अनुरूप बकाये की सारी राशि का भुगतान करना होगा.

पीठ ने कहा कि दूरसंचार कंपनियों द्वारा किये गए स्व-मूल्यांकन को अनुमति देने का मतलब न्यायालय का इस छल में पक्षकार बनना है. शीर्ष अदालत ने कहा कि एजीआर बकाया राशि के मामले में हमारा फैसला अंतिम है और इसका पूरी तरह पालन करना होगा.