एमेजॉन को झटका देते हुए सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने फ्यूचर ग्रुप को रिलायंस को अपनी परिसंपत्ति बेचने की योजना को मंजूरी दे दी है. 24,713 करोड़ रुपये के इस सौदे पर सेबी की मुहर से रिलायंस-फ्यूचर को बड़ी राहत मिली है.Also Read - ई-बुक पढ़ने वालों को झटका, एंड्राएड यूजर्स के लिए Amazon बंद कर रहा E-Book की बिक्री, ये है वजह

अमेरीकी ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन लगातार रिलायंस-फ्यूचर सौदे का विरोध कर रही है. सौदे के विरोध में एमेजॉन ने भारतीय सेबी, स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य रेगुलेटरी एजेंसियों को कई खत लिख थे. पत्रों में एमेजॉन ने सौदे को अनुमति नहीं देने का अनुरोध किया था. एमेजॉन के अनुरोध को दरकिनार करते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कुछ शर्तों के साथ इस सौदे को सशर्त मंजूरी दे दी है. Also Read - रिलायंस और यूएई की कंपनी ताज़ीज़ के बीच बड़ा समझौता, 2 अरब डॉलर के शेयरधारक समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) सौदे को पहले ही मंजूरी दे चुका है. अब सेबी की मंजूरी के बाद एनसीएलटी की मंजूरी मिलना बाकी है. सेबी ने सौदे की पूरी जानकारी फ्यूचर के शेयरहोल्डर्स के साथ साझा करने का आदेश भी जारी किया है. फ्यूचर-रिलायंस ग्रुप के इस सौदे पर सेबी की अनुमति अदालत में लंबित मामलों के नतीजों पर निर्भर करेगी. फ्यूचर कंपनी बोर्ड ने रिलायंस रिटेल को संपत्ति बेचने के 24,713 करोड़ रुपये के सौदे के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसे 21 दिसंबर के फैसले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने वैद्य करार दिया था. न्यायालय ने फ्यूचर रिटेल और रिलायंस रिटेल के सौदे को प्रथम ²ष्टया कानूनी रुप से सही माना था. Also Read - 2015 के बाद अमेज़ॅन को पहली बार किसी तिमाही में उठाना पड़ा है घाटा, जानें- क्यों हुआ ऐसा?

एमेजॉन ने 2019 में फ्यूचर कूपन्स की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी 2,000 करोड़ रुपए में ली थी. डील में एक शर्त यह भी थी कि किसी दूसरी कंपनी के साथ डील करने से पहले फ्यूचर को पहले एमेजॉन को बताना पड़ेगा. एमेजॉन के मना करने पर ही फ्यूचर किसी और को होल्डिंग नहीं बेच सकेगी. एमेजॉन ने फ्यूचर के साथ हुई इस डील में कुल तीन समझौते किए थे, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एफडीआई नीति का हवाला देते हुए कहा था कि, लगता है कि इन समझौतों का इस्तेमाल फ्यूचर रिटेल पर नियंत्रण के लिए किया गया और वो भी बिना किसी सरकारी मंजूरी के, यह फेमा-एफडीआई नियमों के खिलाफ है.

एमेजॉन ने फ्यूचर-रिलायंस डील के खिलाफ सिंगापुर इंटरनेशनल आर्ब्रिटेशन सेंटर में याचिका दायर की थी. आर्ब्रिटेशन सेंटर ने पिछले साल 25 अक्टूबर को फ्यूचर-रिलायंस डील पर रोक लगा दी थी, लेकिन फ्यूचर का कहना है कि आर्ब्रिटेशन सेंटर का फैसला उस पर लागू नहीं होता.

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड ने इस साल अगस्त में फ्यूचर ग्रुप के रीटेल एंड होलसेल बिजनेस और लॉजिस्टिक्स एंड वेयरहाउसिंग बिजनेस के अधिग्रहण का ऐलान किया था. इस डील के बाद फ्यूचर ग्रुप के 420 शहरों में फैले हुए 1,800 से अधिक स्टोर्स तक रिलायंस की पहुंच बन जाती. यह डील 24713 करोड़ में फाइनल हुई थी.
(Inputs from IANS)