मुंबई: बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स सोमवार को करीब 262 अंक टूटकर 37,123.31 अंक पर बंद हुआ. सऊदी अरब के सबसे बड़े तेल संयंत्र पर ड्रोन हमले के बाद कच्चे तेल के दाम में उछाल को देखते हुए निवेशकों की घबराहट में की गयी बिकवाली से बाजार में गिरावट आयी. बीएसई का तीस शेयरों वाला सेंसेक्स 261.68 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 37,123.31 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह करीब 356 अंक नीचे चला गया था. इसी प्रकार, नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी भी 79.80 अंक यानी 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 10,996.10 अंक पर बंद हुआ.

अरब देशों में ताजा भू-राजनीतिक तनाव से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई. सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये सरकार की तरफ से पिछले शनिवार को निर्यात और आवास क्षेत्र के लिये उठाये गये कदमों का असर बाजार पर नहीं देखा गया. तेल के दाम में तेजी के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 67 पैसे लुढ़क कर 71.60 पर बंद हुआ. सेंसेक्स के शेयरों में 24 नुकसान में जबकि 6 लाभ में रहे. नुकसान में रहने वाले सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा, एसबीआई, येस बैंक, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी, टाटा स्टील और एल एंड टी शामिल हैं. इनमें 2.55 प्रतिशत तक की गिरावट आयी.

वहीं दूसरी तरफ टेक महिंद्रा, ओएनजीसी, सन फार्मा, एचयूएल, टीसीएस और भारती एयरटेल 1.44 प्रतिशत तक मजबूत हुए. सऊदी अरब के दो तेल संयंत्रों पर ड्रोन से हमले के बाद कच्चे तेल के दाम में तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड का भाव सोमवार को कारोबार के दौरान करीब 20 प्रतिशत उछलकर 71.95 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया. 1988 में शुरू तेल के वायदा कारोबार के बाद से डॉलर के संदर्भ में यह सबसे बड़ी तेजी है. तेल एवं गैस कंपनियों में एचपीसीएल, बीपीसीएल, आईओसी, कैस्ट्रोल इंडिया और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 7 प्रतिशत तक की गिरावट आयी.

विमानन कंपनियों में स्पाइसजेट, इंटरग्लोब एविएशन और जेट एयरवेज के शेयरों में 3.95 प्रतिशत तक की गिरावट आयी. शेयरखान बाई बीएनपी परिबा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और पूंजी बाजार रणनीति एवं निवेश मामलों के प्रमुख गौरव दुआ ने कहा कि सप्ताहांत सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों से व्यापार युद्ध से जुड़ी अनिश्चितताएं बढ़ी हैं. इससे वैश्विक स्तर पर बाजार की स्थिति और खराब हुई है. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के दाम में तेजी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर होगा. इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि भारतीय शेयर बाजारों ने सरकार की निर्यात और आवास क्षेत्र के लिये महत्वूपर्ण घोषणा की उपेक्षा की.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये शनिवार को निर्यातकों और रीयल एस्टेट क्षेत्र के लिये 70,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन उपायों की घोषणा की. इसमें अधूरी आवास परियोजनाओं को पूरा करने के लिये वित्तपोषण मुहैया कराने हेतु एक कोष की स्थापना जैसी योजनाओं के लिये 30 हजार करोड़ रुपये के खर्च भी शामिल हैं. इसके अलावा सोमवार को जारी सरकारी आंकड़े के अनुसार थोक महंगाई दर अगस्त में 1.08 पर बनी रही. जुलाई में महंगाई दर का स्तर यही था. एशिया के अन्य बाजारों में शंघाई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में रहे जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी लाभ में रहा. यूरोप के प्रमुख बाजारों में शुरूआती कारोबार में गिरावट का रुख रहा.