अटल बिहारी सरकार में वित्र मंत्री रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत के लिए अरुण जेटली पर निशाना साधा. बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस में ‘I need to speak-up now’ शीर्षक से एक लेख लिखा जिसमें उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी समेत एनडीए सरकार के कई फैसलों की आलोचना की थी. सिन्हा के लेख में ज्यादातर बातें वहीं थी जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम दोहराते रहे हैं. अपने पिता के लेख के जवाब में पुत्र जयंत सिन्हा ने भी गुरुवार को टाइम्स ऑफ इंडिया में ‘New Economy For New India’ नाम से एक लेख लिखा. जयंत सिन्हा केंद्रीय उड्डयन मंत्री हैं. जयंत ने इस लेख में अपने पिता के वार पर पलटवार किया है. यहां पढ़िए भारतीय अर्थव्यवस्था पर यशवंत सिन्हा की आशंकाएं और जयंत सिन्हा की संभावनाएं…
यशवंत सिन्हाः निजी निवेश में आज जितनी गिरावट है उतनी दो दशक में नहीं हुई, औद्योगिक उत्पादन का बुरा हाल है, कृषि क्षेत्र परेशानी में है, बड़ी संख्या में रोजगार देने वाला निर्माण उद्योग भी इस वक्त संकट में है.
जयंत सिन्हाः वर्तमान अर्थनीति नए भारत के निर्माण की दिशा में उठाया गया कदम है. पारदर्शी, प्रतियोगी और प्रगतिशील अर्थव्यवस्था के लिए बदलाव हो रहे हैं. एक या दो तिमाही के नतीजों से अर्थव्यस्था का आकलन ठीक नहीं.
यशवंत सिन्हाः नोटबंदी ने सिर्फ आग में घी डालने का काम किया है. जीएसटी के फैसले ने अर्थव्यवस्था को राहत दी या नहीं ये तो दीर्घकालीन विषय है लेकिन वर्तमान समय में देश के व्यापारियों को सरकार के इस कदम ने औंधे मुंह गिरा दिया है. छोटे बड़े सभी व्यापारी इस फैसले से दुखी हैं.
जयंत सिन्हाः जीएसटी और नोटबंदी गेमचेंजर हैं. करीब 5000 गांव ही ऐसे बचे हैं, जहां बिजली पहुंचाना बाकी है, जो 2018 तक लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा.
यशवंत सिन्हाः देश के वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था की हालत जो बिगाड़ दी है, ऐसे में अगर मैं अब भी चुप रहूं तो ये राष्ट्रीय कर्तव्य के साथ अन्याय होगा.
जयंत सिन्हाः हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों पर काफ़ी लेख लिखे गए हैं. दुर्भाग्य से इनमें बहुत संकुचित तथ्यों से निष्कर्ष निकाले गए हैं, जबकि उन बुनियादी ढांचागत सुधारों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया है, जो अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं.
यशवंत सिन्हाः रेड राज आजकल आम बात हो गई है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास कई केस हैं जिनसे लाखों लोग जुड़े हैं. ईडी और सीबीआई के हाथ भी खाली नहीं हैं. लोगों के मन में डर पैदा करने का खेल शुरू हो गया है.
जयंत सिन्हाः टैक्स के दायरे से बाहर और अनाधिकारिक तौर पर होने वाला भुगतान अब औपचारिक दायरे में आ गए हैं. सभी मंत्रालयों में नीति-निर्माण अब नियम आधारित हो गया है. प्राकृतिक संसाधन और लाइसेंस पारदर्शी नीलामी के ज़रिए सौंपे जा रहे हैं.
यशवंत सिन्हाः सरकार ने 2015 में जीडीपी की गणना करने के तरीके में बदलाव किया था, इस तरीके से गणना करने पर जीडीपी रेट में 2 प्रतिशत का अंतर आता है.
जयंत सिन्हाः लगभग हर भारतीय के पास अब बेसिक सेफ़्टी नेट होगा जिसमें खाने, बिजली, रोज़गार, हाउसिंग, बैंक खाते, टॉयलेट, गैस, बीमा कवर, माइक्रो लोन और सड़क की गारंटी होगी.
बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल यशवंत सिन्हा ने अपने कर्तव्य का निर्वहन तो कर दिया. लेकिन बीजेपी उनकी बात को गंभीरता से लेने की बजाए उसका काट खोजने में जुटी है. शायद इसी कड़ी में उनके बेटे को ही सामने ला दिया गया है. लेकिन कुछ तर्क तो साफ तौर पर इशारे कर रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यस्था सही ट्रैक पर नहीं है.
जीएसटी लागू होने से पहले यानी जुलाई से सितंबर 2016 में आर्थिक विकास दर 7 फीसदी थी, लेकिन जीएसटी के बाद अप्रैल से जून 2017 की तिमाही में गिरकर 5.7 फीसदी पर पहुंच गयी. चालू खाते का घाटा पिछले चार साल में सबसे ज्यादा हो गया है. दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ सालों के मुकाबले निचले स्तर पर हैं लेकिन भारत में पेट्रोल की कीमतों में आग लगी हुई है. रोजगार देने के मामले में भी मोदी सरकार फिसड्डी साबित हो रही है. हालांकि अर्थव्यवस्था कोई जादू की झड़ी नहीं है जो घुमाते ही सबकुछ ठीक कर दे. पिछले कुछ समय में सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं. उम्मीद की जानी चाहिए कि वो सही निशाने पर जा लगें!
Disclaimer: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के अपने हैं.
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