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Sovereign Gold Bond Scheme 2023: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में आज से इन्वेस्ट करने का मौका, जानें- स्कीम से जुड़ी खास बातें
Sovereign Gold Bond Scheme 2023: FY 2023-24 के लिए SGB की पहली सीरीज आज से निवेश के लिए खुल गई है, यह 23 जून तक खुली रहेगी.
Sovereign Gold Bond Scheme 2023: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2023-24 की पहली सीरीज़ को लॉन्च कर दिया है. इन्वेस्ट करने के लिए यह सोमवार यानी 19 जून को खुल गई है, जो 23 जून को बंद होगी.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना सरकार की एक पहल है जो लोगों को पेपरलेस तरीके से सोने में इन्वेस्ट करने का मौका देती है. फिजिकल सोना खरीदने के बजाय, इन्वेस्टर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए बांड्स खरीदते हैं, जो सोने की कीमत से जुड़े होते हैं.
आज से निवेश करने का मौका
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की FY 2023-24 की पहली सीरीज 19 जून से खुल गई है, जो 23 जून को बंद होगी.
2.5 फीसदी की दर से मिलेगा ब्याज
सॉवरेन गोल्ड बांड (SGB) सामान्य तौर पर एक ग्राम सोने की कीमत पर लॉन्च किए जाते हैं. इन्वेस्टर्स को 5,926 रुपये प्रति बॉन्ड के हिसाब से जारी किया गया है. डिजिटल मोड का उपयोग करके आवेदन करने और पेमेंट करने वाले इन्वेस्टर्स के लिए प्रति ग्राम 50 रुपये की छूट दी जा रही है. जिसके बाद 1 ग्राम सोने की कीमत 5,876 रुपये होगी. इन्वेस्टर्स को एसजीबी पर 2.5 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा, जो छमाही देय होगा.

इन्वेस्टमेंट का टेन्योर
SGB में इन्वेस्टमेंट का टेन्योर आठ साल का होता है और वे स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध होते हैं. इन्वेस्टर एसजीबी में एक्सचेंजों पर लेनदेन कर सकते हैं. वे उन्हें पांच साल बाद आरबीआई के पास इनकैश भी करा सकते हैं.
इन्वेस्ट करने का प्रभावी तरीका
एसजीबी मैच्योरिटी पर एक ग्राम सोने के उस समय चले रही कीमत के हिसाब से पेमेंट करते हैं, जो जारी करने के समय एसजीबी की कीमत पर पेमेंट किए गए ब्याज के अतिरिक्त होता है, यह सोने में इन्वेस्ट करने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है.
पात्रता
यह योजना निवासी व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF), ट्रस्टों और धर्मार्थ संस्थानों के लिए खुली है. अनिवासी भारतीय (NRI) सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के लिए पात्र नहीं हैं.
डीनॉमिनेशन
बांड एक वित्तीय वर्ष (अप्रैल से मार्च) में व्यक्तियों और एचयूएफ के लिए 1 ग्राम के न्यूनतम इन्वेस्ट और 4 किलोग्राम की अधिकतम सीमा के साथ ग्राम सोने के डीनॉमिनेशन में जारी किए जाते हैं.

गौरतलब है कि सोना एक बहुत ही अनस्टेबल असेट रहा है. कैलेंडर वर्ष 2021 में रुपये के लिहाज से सोने में 4.2 फीसदी गिरावट आई और कैलेंडर वर्ष 2022 में 13.8 फीसदी बढ़ा. जब शेयर अस्थिर होते हैं तो सोने में इन्वेस्ट की सबसे अधिक मांग होती है.
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