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Sovereign Gold Bond Scheme: फिर आया गोल्ड बांड स्कीम में निवेश का मौका, 4842 रुपये तय हुई कीमत
Sovereign Gold Bond Scheme: गोल्ड बांड स्कीम में निवेश आज फिर से खुल गया है. प्रति ग्राम सोने की कीमत 4,842 रुपये तय की गई है. लेकिन ऑनलाइ खरीदारी पर 50 रुपये सस्ता मिलेगा.
Sovereign Gold Bond Scheme: सॉवरेन गोल्ड बांड की दूसरी किश्त 24 मई से 28 मई के बीच खुलेगी. पहली किश्त के लिए सब्सक्रिप्शन मूल्य 4,777 रुपये प्रति ग्राम तय किया गया था. दूसरी किस्त के लिए सोने का दाम 4,842 रुपये प्रति ग्राम तय किया गया है. गोल्ड बांड ऑनलाइन खरीदने पर प्रति ग्राम 50 रुपये की छूट का प्रावधान किया गया है.
बता दें, केंद्र सरकार इस साल मई 2021 से सितंबर 2021 के बीच छह किश्तों में गोल्ड बांड्स जारी करेगी. इसमें पहली किश्त 17 मई से 21 मई तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुली थी और अब दूसरी किश्त के लिए भी सरकार ने मूल्य तय कर दिया है. सोने में निवेश करने वालों के लिए यह निवेश का सुनहरा मौका है. भारत में सोने के निवेश विकल्पों में सॉवरेन गोल्ड बांड सबसे बेहतर माना जाता है और इसे केंद्र सरकार के कहने पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी किया जाता है.
जानि- कहां से खरीदें गोल्ड बॉन्ड?
एसजीबी के हर आवेदन के साथ निवेशक के पास PAN होना जरूरी है. गोल्ड बॉन्ड को ऑनलाइन खरीद सकते हैं. इसके अलावा इसकी बिक्री बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL), चुनिंदा डाकघरों और एनएसई व बीएसई जैसे स्टॉक एक्सचेंज के जरिए भी होगी. स्माल फायनेंस बैंक और पेमेंट बैंक में इनकी बिक्री नहीं होती है.
जानिए- क्या है निवेश की सीमा?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में एक वित्त वर्ष में एक व्यक्ति अधिकतम 4 किलो ग्राम सोने के बॉन्ड खरीद सकता है. इसमें कम से कम एक ग्राम सोने के लिए निवेश कर सकते हैं. HUFs एक वित्त वर्ष में 4 किलोग्राम तक निवेश कर सकेंगे, जबकि ट्रस्ट इसमें 20 किलोग्राम तक निवेश कर सकेंगे.
जानिए- गोल्ड बांड के क्या हैं फायदे?
- गोल्ड बांड मैच्योरिटी पर टैक्स फ्री होता है. इसमें एक्सपेंस रेशियो कुछ भी नहीं है. भारत सरकार द्वारा समर्थित होने से डिफॉल्ट का खतरा नहीं होता है.
- यह HNIs के लिए भी बेहतर विकल्प है, जहां इसमें मैच्योरिटी तक होल्ड करने में कैपिटल गेंस टैक्स नहीं देना होता है. इक्विटी पर 10 फीसदी कैपिटल गेंस टैक्स लगता है. ऐसे में लंबी अवधि के निवेश विकल्पों में यह बेहतर साबित हो रहा है.
- फिजिकल गोल्ड की बजाय गोल्ड बांड को मैनेज करना ज्यादा आसान और सुरक्षित होता है.
- इसमें प्योरिटी का कोई झंझट नहीं होता और कीमतें सबसे शुद्ध सोने के आधार पर तय होती हैं.
- इसमें एग्जिट के आसान विकल्प हैं.
- गोल्ड बांड के अगेंस्ट लोन की सुविधा भी मिलती है.
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