Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये डूबे
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये डूब गए. सेंसेक्स और निफ्टी समेत मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितता रहा.
Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 824 अंक गिरकर 75,366 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 263 अंक की गिरावट के साथ 22,829 पर रहा. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2.75% यानी 1,467 अंक टूटकर 51,795 पर पहुंच गया. वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 3.84% यानी 651 अंक गिरकर 16,304 पर बंद हुआ.
बाजार पूंजीकरण में भारी कमी
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 9 लाख करोड़ रुपये घटकर 410 लाख करोड़ रुपये रह गया.
लाल निशान में बंद हुए सभी इंडेक्स
लगभग सभी सेक्टर्स में गिरावट रही. ऑटो, फार्मा, मेटल, रियल्टी, मीडिया और एनर्जी इंडेक्स ने बाजार में कमजोरी का नेतृत्व किया. बाजार के अंत में 3,519 शेयरों में गिरावट रही, जबकि सिर्फ 597 शेयर बढ़त दर्ज कर सके.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स में आईसीआईसीआई बैंक, एचयूएल, एमएंडएम, एसबीआई, मारुति सुजुकी और एलएंडटी जैसे शेयरों ने कुछ मजबूती दिखाई. दूसरी ओर, एचसीएल टेक, जोमैटो, टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स और पावर ग्रिड जैसे दिग्गज शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई.
वैश्विक घटनाक्रम का असर
बाजार के गिरने का मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितता को माना जा रहा है. अमेरिका द्वारा कोलंबिया पर 25% टैरिफ लगाने से व्यापारिक माहौल में तनाव बढ़ा है. इस कदम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको पर भी सख्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है.
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तकनीकी कंपनियों पर संकट
चीन के कम लागत वाले एआई मॉडल “डीपसीक” के लॉन्च से अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों जैसे एनवीडिया, ओपनएआई और गूगल पर दबाव बढ़ा है. इस प्रतिस्पर्धा के चलते वैश्विक बाजारों में कमजोरी आई है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी दिखा.
बाजार विशेषज्ञों की राय
जानकारों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के अलावा घरेलू निवेशकों की धारणा पर भी दबाव है. कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों और बढ़ती चिंताओं के चलते आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
आगे की रणनीति
निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे बाजार के इस गिरावट वाले दौर में सतर्क रहें. लंबी अवधि के नजरिए से मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश करना सही रणनीति हो सकती है.
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