Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई. अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क लगाने की आशंका और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के चलते निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और ब्याज दरों में कटौती को लेकर अनिश्चितता भी बाजार पर हावी रही.
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 203.22 अंक या 0.27% गिरकर 75,735.96 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 476.17 अंक तक गिरकर 75,463.01 अंक के निचले स्तर पर आ गया था. वहीं, एनएसई निफ्टी भी 19.75 अंक या 0.09% की हल्की गिरावट के साथ 22,913.15 अंक पर बंद हुआ.
बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और बजाज फाइनेंस शामिल रहे.
हालांकि, बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई. एनटीपीसी, अदाणी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील और इंडसइंड बैंक के शेयर बढ़त में रहे.
बाजार आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 1,881.30 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की. इसने बाजार में दबाव बढ़ा दिया. दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने कुछ खरीदारी की, जिससे बाजार को आंशिक सहारा मिला.
जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, अमेरिकी नीतियों को लेकर निवेशकों में चिंता बनी हुई है. भारतीय वस्तुओं पर संभावित अमेरिकी शुल्क से निर्यात प्रभावित हो सकता है. साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती में देरी की संभावना के कारण वैश्विक बाजार भी सतर्क बने हुए हैं.
एशिया के अन्य बाजारों में भी गिरावट देखी गई. दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग लाल निशान में बंद हुए. हालांकि, यूरोपीय बाजार दोपहर के कारोबार में बढ़त में थे, जबकि अमेरिकी बाजार बुधवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे.
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.08% बढ़कर 76.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिससे ऊर्जा सेक्टर पर सकारात्मक असर पड़ा.
विश्लेषकों के मुताबिक, निवेशकों को अमेरिकी नीतियों पर स्पष्टता का इंतजार है. बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत से लंबी अवधि में निवेशकों के लिए उम्मीदें बनी रहेंगी.
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