बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरे

विदेशी बिकवाली, बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक चिंताओं के कारण भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स-निफ्टी 1% से ज्यादा गिरे.सभी प्रमुख सेक्टर्स में गिरावट रही, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में रहे.

Published date india.com Published: December 13, 2024 11:46 AM IST
बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरे

Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स 1,017.03 अंक (1.25%) गिरकर 80,272.93 पर और निफ्टी 306.80 अंक (1.25%) गिरकर 24,241.90 पर बंद हुआ.विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा भारी बिकवाली और वैश्विक चिंताओं के कारण बाजार में उथल-पुथल देखी गई.

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व पर नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और 18 दिसंबर को फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर संभावित फैसले ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.इसके अलावा, मध्य पूर्व में चल रहे तनावपूर्ण हालात भी बाजार पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं.

एफआईआई की बिकवाली जारी

12 दिसंबर को एफआईआई ने भारतीय बाजार में 3,560.01 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,646.65 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.एफआईआई की इस बिकवाली ने बाजार पर भारी दबाव डाला.

टॉप लूजर्स: कौन-कौन हुए प्रभावित?

सेंसेक्स पैक में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, एसबीआई, एमएंडएम और बजाज फाइनेंस सबसे ज्यादा नुकसान में रहे.

सेक्टोरल गिरावट का असर

सभी प्रमुख सेक्टर्स में बिकवाली देखी गई.निफ्टी पीएसयू बैंक, धातु, रियल एस्टेट, ऑटो, आईटी, फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई.

मिडकैप और स्मॉलकैप पर भी दबाव

निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.59% की गिरावट के साथ 58,082.85 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.01% की गिरावट के साथ 19,074.70 पर आ गया.

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आगे क्या?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बाजार पर एफआईआई की बिकवाली का दबाव बना रहेगा. उच्च मूल्यांकन और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता से निवेशकों की धारणा कमजोर हो सकती है.हालांकि, घटती मुद्रास्फीति और घरेलू संस्थागत निवेशकों का समर्थन बाजार को स्थिरता दे सकता है.

गौरतलब है कि विदेशी बिकवाली और वैश्विक चिंताओं के बीच बाजार में भारी गिरावट देखी गई.निवेशकों को सतर्क रहने और दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है.

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