Chanda Kochar Latest News: आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंधक निदेशक (MD) चंदा कोचर को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ चंदा कोचर की याचिका खारिज कर दी है. इस याचिका में चंदा कोचर ने बैंक से उन्हें बर्खास्त करने के खिलाफ दायर अर्जी को हाई कोर्ट द्वारा अस्वीकार किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी. Also Read - UPSC Exam: UPSC में शामिल होने के आखिरी मौके वाले उम्मीदवारों को झटका, नहीं मिलेगा कोई अन्य अवसर, जानें पूरा मामला

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हम उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं हैं. यह मामला निजी बैंक और कर्मचारी के बीच का है. Also Read - Supreme Court Issued notice to Mirzapur Makers: मुश्किल में 'मिर्जापुर', SC ने जारी किया नोटिस

बता दें, मार्च में बॉम्बे हाई कोर्ट ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर की उनके पद से हटाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था. इसके बाद चंद कोचर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. Also Read - Aadhar Card Latest Update: आपका आधार कार्ड है सुरक्षित, Supreme Court ने खारिज की याचिका

जानें- क्यों चल रहा है चंदा कोचर पर केस

चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक द्वारा नौकरी से निकाले जाने के निर्णय को चुनौती देते हुए 30 नवंबर 2019 को बांबे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कोचर के वकील ने दलील दी कि बैंक ने कोचर के स्वैच्छिक इस्तीफे को 5 अक्टूबर 2018 को स्वीकार कर लिया था. इसलिए बाद में उन्हें नौकरी से निकाला जाना अवैध है. कोचर ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि बैंक ने उनका वेतन और अप्रैल 2009 से मार्च 2018 के बीच मिले बोनस और शेयर विकल्प आय को भी देने से मना कर दिया है.

जानें- क्या है चंदा कोचर पर आरोप

चंदा कोचर पर आरोप है कि उन्होंने वीडियोकॉन समूह को अवैध तरीके से 3250 करोड़ रुपये का ऋण देने में कथित भूमिका अदा की और इससे उनके पति दीपक कोचर को लाभ हुआ. इस मामले के सामने आने के बाद ही कोचर को अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था. जिसके बाद बैंक ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया.

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने इस साल की शुरुआत में चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर, धूत और अन्य के खिलाफ आईसीआईसीआई द्वारा वीडियोकॉन समूह को लोन देने की मंजूरी देने के मामले में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच के लिए पीएमएलए के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था. इसके बाद ईडी ने सबूतों की तलाश के लिए 1 मार्च को छापेमारी की थी.