पैन कार्ड (Permanent Account Number) साल 2018 में सबसे ज्यादा सुर्खियों में बना रहा. सरकार के आदेश के बाद पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करना अनिलार्य कर दिया गया. हालांकि इसे लिंक करने में लोगों को थोड़ी समस्या काम सामना भी करना पड़ा लिहाजा सरकार ने इसकी डेडलाइन बढ़ा दी. पैन कार्ड एक जरूरी डॉक्यूमेंट है जो व्यक्ति के फाइनेंशियल स्टेटस को दिखाता है. पैन या परमानेंट अकाउंट नंबर 10 डिजिट का एक ऐसा नंबर है, जो आयकर विभाग की ओर से जारी किया जाता है.

आयकर विभाग के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति पैन कार्ड लेने के योग्य होने के बावजूद इसे नहीं लेता है उस पर आईटी एक्ट की धारा 272B के तहत 10 हजार का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा रिटर्न फाइल करते समय अगर करदाता गलत जानकारी देता है तो भी उसपर 10 हजार का जुर्माना लगाया जा सकता है. पांच लाख या उससे अधिक की अचल संपत्ति को खरीदने के दौरान भी पैन की जानकारी देना जरूरी है.

पैन कार्ड से संबंधित कुछ जरूरी बातें:
1. सभी मौजूदा मूल्यांकित व्यक्ति या करदाता या व्यक्ति जिन्हें आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो, दूसरों की ओर से भी, को पैन प्राप्त करना चाहिए.
2. कोई भी व्यक्ति, जो किसी भी वित्तीय लेनदेन की करना चाहता है, जहां पैन का उल्लेख करना अनिवार्य हो, उसे पैन प्राप्त करना होगा.

3. मूल्यांकन अधिकारी या तो स्वयं या विशेष अनुरोध पर किसी व्यक्ति को पैन आवंटित कर सकते हैं.
4. आयकर अदा करने वाले शख्स के पास पैन कार्ड होना जरूरी है.
5. वित्तीय संस्थानों में टाइम डिपॉजिट या फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम में 50,000 रुपए से अधिक रकम जमा करने पर पैन कार्ड जरूरी है.
6. पोस्ट ऑफिस के सेविंग अकाउंट में भी 50,000 रुपए से अधिक की नकदी जमा करने पर पैन नंबर देना अनिवार्य है.

ऐसे बनवाएं पैन कार्ड:
अगर आप आयकर भुगतान के दायरे में आते हैं तो आपके लिए पैन कार्ड जरूरी है. पैन कार्ड बनवाने के लिए आपको 49ए फॉम डाउनलोड करना होगा जिसे आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है. आवेदन के बाद आपको एक नंबर दिया जाता है जिसके जरिए आप पैन कार्ड एप्लीकेशन का स्टेटस पता कर सकते हैं.